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‘आसक्त रहकर कर्म करना मानव का प्रधान धर्म है’

3 वर्ष पहले
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प्रभु सुख व्यापक है, यह सारा जगत ईश्वर व्याप्त है। आसक्त रहकर कर्म करना मानव का प्रधान धर्म है। भगवान श्री राम और श्री कृष्ण ने अपनी लीला के माध्यम से मानव को श्रेष्ठ आचरण करना बताया है।

यह बात दीनदयाल नगर स्थित नगरेश्वर महादेव मंदिर में पं. योगेश्वर शास्त्री ने कही। उन्होंने कहा इंद्रियों को जब भक्ति रस मिलता है तब वे शांत होती हैं। जीव अनेकों जन्म से कई योनी में भ्रमण करता हुआ आ रहा है। पैर की शक्ति कमजोर हो जाए तब समझो मृत्यु का समय निकट आ रहा है। उस समय कोई भी परिजन काम नहीं आता है, भगवान का भजन काम आता है। प्रत्येक जन्म की भक्ति मनुष्य के संकट के समय में काम आती है। कथा के दौरान शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया। कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान श्रद्धालु श्रीकृष्ण की भक्ति में रम गए। जन्मवाचन के दौरान श्रद्धालुओं ने जय-जयकार लगाई। इसके बाद ढोल-ढमाकों के साथ आरती की गई। श्री नगरेश्वर महादेव समिति व श्री श्याम सखी मंडल ने श्रद्धालुओं से धर्मलाभ लेने की अपील की। कथा का वाचन प्रतिदिन दोपहर 1 से शाम 4 बजे तक किया जा रहा है।

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