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भारतीय संस्कृति में राम-सीता आदर्श दंपती

3 वर्ष पहले
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श्री राजपूत नवयुवक मंडल, न्यास एवं महिला मंडल के तत्वावधान में हाथीखाना स्थित राजपूत धर्मशाला में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन सीता राम विवाह के प्रसंग का सजीव चित्रण किया। वरमाला के बाद महिलाओं ने पुष्पवर्षा व नृत्य कर खुशियों का इजहार किया।

कथा वाचक पं. दिनेशकृष्ण शास्त्री ने कहा शिव धनुष तोडऩे के बाद जब सीता ने राम के गले में माला पहनाई तो देवताओं ने भी आसमान से फूलों की वर्षा की और पुरी जनक नगरी में खुशियां मनाई जा रही थी। भारतीय संस्कृति में राम-सीता आदर्श दंपति माने गए हैं। जिस प्रकार प्रभु श्रीराम ने सदा मर्यादा का पालन कर पुरुषोत्तम पद पाया उसी तरह सीता माता ने संसार के समक्ष पतिव्रता स्त्री होने का सर्वोपरि उदाहरण प्रस्तुत किया। भगवान राम और सीताजी के विवाह का प्रसंग सुनने और सुनाने से जीवन सुखमय होता है। भजनोपदेशक तेजकुमार सोलंकी ने भजनों के माध्यम से कहा पिता के पुण्य का फल पुत्र को प्राप्त होता है। इसलिए सतत् पुण्यकर्म करना चाहिए। जिससे आने वाली पीढ़ी को सुख प्राप्त हो सके। पोथी पूजन व कथा वाचक पं. शास्त्री का साफा बांधकर सम्मान श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के नगर महासचिव जसवंतसिंह पंवार, राहुलसिंह शक्तावत, यादवेंद्रसिंह तोमर, प्रीति सोलंकी, सीमा देवड़ा ने किया। सावन मास के उपलक्ष्य में भगवान जागनाथ महादेव की प्रतिदिन शाम 7.30 बजे महाआरती कर प्रसादी वितरण किया जा रहा है। महिला मंडल अध्यक्ष मंजुला गेहलोत, उषा पंवार, राजेश्वरी राठौर, वसुमति सिंह, गीता राठौर, निशा वाघेला आदि मौजूद थे।

आचार्यश्री का सम्मान करते हुए करणी सेना के यादवेंद्रसिंह तोमर व अन्य।

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