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तनाव का विष घर, बाहर व संस्कृति के संसार में तेजी से घर कर रहा है

3 वर्ष पहले
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आज चारों तरफ आपसी वैमनस्य, विवाद, झगड़े, तनाव रंजिश आदि की बयार चल रही है, घर से लेकर बाहर और संस्कृति के संसार में तनाव का विष तेजी से घर कर रहा है। इससे कई जीवन नष्ट हो रहे है और जगह-जगह लोग नर्क सा जीवन जी रहे हैं। इस तनाव और झगड़े को निवारण के प्रयास से दूर किया जाकर हिंसा और अशांति को दूर किया जा सकता है।

यह बात दिगंबर जैन धर्म प्रभावना चातुर्मास समिति द्वारा लोकेंद्र भवन में आयोजित चातुर्मास में मुनि प्रमाणसागरजी ने धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा आज घर से लेकर बाहर तक छोटे-छोटे मतभेद मन में नकारात्मक सोच पैदा कर रहे हैं। अगर समय रहते इनका निवारण मिल बैठ कर नहीं किया जाता है तो ये क्लेश का बड़ा कारण बन जाते हैं। आज घर के झगड़े बाहरी प्रचार का माध्यम बनते जा रहे हैं। कलह, उग्रता से ग्रस्त मानसिकता हमारे प्रेम और आनंद को नष्ट कर रहे हैं।

धार्मिक कक्षा में युवा बढ़-चढ़कर ले रहे हिस्सा- संत शिरोमणि विद्यासागरजी के शिष्य मुनिश्री 108 प्रमाण सागरजी व मुनिश्री 108 विराट सागरजी महाराज के सान्निध्य में चातुर्मास के दौरान लोकेंद्र भवन में प्रतिदिन विभिन्न कार्यक्रम हो रहे है। दिगंबर जैन धर्म प्रभावना चातुर्मास समिति के सचिव व प्रवक्ता मांगीलाल जैन ने बताया लोकेंद्र भवन में प्रतिदिन सुबह 7.15 बजे जिनेंद्र भगवान का अभिषेक व शांतिधारा, सुबह 7.30 से 8 बजे तक युवा वर्ग की धार्मिक कक्षा लग रही है। सुबह 8.30 से 9.20 तक मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज के मंगल प्रवचन हो रहे हैं। रोज शाम 7 बजे से 7.30 बजे तक भक्तांबर स्त्रोत पर आधारित बच्चों की पाठशाला मुनिश्री विराटसागरजी के सान्निध्य में चल रही है।

लोकेंद्र भवन में प्रवचन देते हुए मुनिश्री व उपस्थित श्रद्धालु।

कलह के चार कारण

मुनिश्री ने कहा रुचिभेद, चिंतनभेद, आग्रह और गलतफहमी जैसे चार कारण कलह पैदा करते हैं। इन्हें दूर करने के लिए सकारात्मक सोच, समग्रता का चिंतन, सहिष्णुता का विकास और विनोद प्रियता समझौते का आधार है। यहां कलह के कारण और इनके निवारण भी मुनिश्री ने बताए हैं। मुनिश्री ने घरेलू कलह, झगड़े और विवाद का एक कारण रुचिभेद बताया है। उन्होंने कहा कि रुचि सबकी अलग-अलग होती है। ऐसे में अपनी रुचि दूसरों पर मत थोपो। अगर बाप बेटे पर, बेटा बाप पर, पत्‍‌नी अपने पति पर, सास बहू पर और बहू सास पर अपनी रुचि थोपने लगेगी की रोज झगड़े होगे। मुनिश्री ने कहा रुचि सबकी अलग-अलग होती है। एक दूसरे पर रुचि थोपते रहोगे तो जिंदगी का रस कभी नहीं ले पाओगे। रुचि भेद हो तो झगड़ा खत्म करने के लिए थोड़ा सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कलह और विवाद का एक कारण आग्रह भी है। आग्रह का मतलब अड़ जाना, अडामेंट हो जाना।

‘संवाद की कमी से गलतफहमी होती है’

मुनिश्री ने कहा मिस कम्युनिकेशन (संवाद की कमी) से गलतफहमी होती है। अंडर स्टेंडिंग (आपसी समझ) बिगड़ती है। लोग गलतफहमी का शिकार बनकर बड़े-बड़े विवाद कर लेते हैं। गलतफहमी का शिकार मत बनिए। किसी के प्रति अगर गलतफहमी है तो पहले इसकी सही जानकारी हासिल करो, और सच्चाई को जानकर आपसी वैमनस्यता को समाप्त करो।

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