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बड़े नोट की सप्लाई नहीं, बैंकें दे रहीं छोटे नोट, दिक्कत बढ़ी

3 वर्ष पहले
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आरबीआई से 500 एवं 2000 रुपए के नोट की सप्लाई नहीं होने से दिक्कतें बढ़ गई हैं। एटीएम से तो 100 और 200 रुपए के नोट निकल रहे हैं। ब्रांचों से भी 50, 100 एवं 200 रुपए के नोट की गड्डी ही दी जा रही है। ऐसे में दिक्कतें बढ़ गई हैं। सबसे ज्यादा परेशानी कारोबारियों को हो रही है और छोटे नोट होने से लाने-ले जाने में भी रिस्क बढ़ गई है।

बैंकों से छोटे नोट मिलने से सबसे ज्यादा परेशानी मंडी में भुगतान में आ रही है। मंडी में रोज 5 करोड़ रुपए का कारोबार होता है। 50 हजार रुपए तक किसानों को नकद देने का नियम है। इससे 2.5 करोड़ रुपए का भुगतान नकद किया जाता है। ऐसे में जब व्यापारी किसानों को छोटे नोट दे रहे हैं तो वे बोल रहे हैं हमें गांव जाना है। इससे बड़े नोट दो ताकि आसानी से ले जा सके। इस बात पर रोज बहस हो रही है। वहीं किसानों को भुगतान के लिए व्यापारी शहर की बैंकों से रुपए निकालकर मंडी ले जा रहे है। इससे व्यापारियों की रिस्क भी बढ़ गई है।

अन्य मंडियों में नकद भुगतान कम, हमारे यहां ज्यादा- व्यापारियों के मुताबिक अन्य मंडी में दस हजार नकद और शेष राशि आरटीजीएस और एनईएफटी से किसानों को दी जाती है। रतलाम मंडी में किसानों को 50 हजार नकद और शेष राशि आरटीजीएस और एनईएफटी से दी जाती है। ऑनलाइन भुगतान बढ़ाया जाए और नकद कम किया जाए तो समस्या दूर हो सकती है।

कलेक्टर और लीड बैंक से मामले में चर्चा करेंगे
व्यापारी प्रतिनिधि मनोज जैन ने बताया एक महीने से दिक्कत बढ़ गई है। मंडी में रोज पांच करोड़ रुपए का भुगतान किसानों को किया जाता है। इसमें से दो करोड़ तो नकद बांटे जाते हैं। बैंकें हमें बड़े नोट नहीं दे रही हैं। इससे रिस्क के साथ दिक्कत बढ़ गई है। व्यापारी जब किसानों को 50 और 100 रुपए की गड्डियों में भुगतान कर रहे हैं तो किसान नहीं लेता और बोलता है बड़े नोट दो। जब बैंकें नहीं दे रही हैं तो हम किसानों को कहां से दें। इससे समस्या आ रही है। इस संबंध में सभी व्यापारियों के साथ जाकर कलेक्टर और लीड बैंक से चर्चा करेंगे।

जो नोट होंगे वो ही तो देंगे
लीड बैंक प्रबंधक के.के. सक्सेना ने बताया बैंक में जो नोट जमा होते हैं वो ही ग्राहकों को दिए जाते है। बैंकों में जो नोट होंगे वो ही तो बैंकें व्यापारियों को देंगी।

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