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नोटिफिकेशन जारी हर साल 1 अप्रैल से नई गाइड लाइन लागू होती है इस बार अब बनेगी

3 वर्ष पहले
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प्रॉपर्टी के दाम तय करने के लिए राज्य सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया है। इस नोटिफिकेशन के बाद समिति का गठन होगा और फिर नई गाइड लाइन तैयार की जाएगी। अगले महीने से इसके लागू होने की संभावना है।

जमीनों के भाव तय करने के लिए हर साल 1 अप्रैल से नई गाइड लाइन लागू होती है। लेकिन राज्य सरकार ने मार्च में नोटिफिकेशन जारी कर 2017-18 की गाइडलाइन को ही आगामी आदेश तक जारी रख दिया था। इससे नई गाइड लाइन एक अप्रैल से लागू नहीं हो पाई है और अभी पिछले वित्तीय वर्ष की गाइड लाइन की कीमतों के आधार पर ही जमीन, मकान, प्लॉट की रजिस्ट्री हो रही है। अब सरकार ने जिला पंजीयक विभाग को नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें प्रॉपटी के दाम तय करने के लिए समिति के गठन करने का आदेश जारी किया है। इसके बाद जिला पंजीयक विभाग सर्वे करेगा और फिर प्रॉपर्टी के दाम तय कर दिए हैं। मई से नई गाइड लाइन लागू होने की संभावना है।

नए सिरे से तय होंगे शहर में प्रॉपर्टी के दाम, अगले महीने से लागू हो जाएगी नई गाइड लाइन

प्रॉपर्टी के दाम तय करने के लिए समिति गठित करने के आदेश, जिला पंजीयक विभाग करेगा सर्वे

कब-कब कितने बढ़े थे दाम

वर्ष 2016 में शहर की 7 कॉलोनियों में ही जमीन के दाम बढ़ा गए थे। इसके अलावा शेष शहर में 2015 के मुताबिक ही दाम रखे थे।

वर्ष 2017 की गाइड लाइन में 40 कॉलोनियों में जमीन के दाम 38 फीसदी तक बढ़ाए थे। बाकी शहर में दस फीसदी दाम बढ़ा गए थे।

जनवरी से रजिस्ट्री कराना पहले ही महंगा कर दिया

इस साल भले ही गाइड लाइन नहीं बढ़ी है लेकिन राज्य सरकार ने जनवरी से रजिस्ट्री कराना पहले ही महंगा हो गया है। कारण रजिस्ट्री शुल्क एक फीसदी तक बढ़ाना। इससे रजिस्ट्री का शुल्क शुल्क 9.3 फीसदी से बढ़कर 10.3 फीसदी हो गया है। इससे 10 लाख रुपए के मकान या प्लॉट की रजिस्ट्री कराने पर लोगों को पहले ही दस हजार रुपए ज्यादा चुकाना पड़ रहे हैं। अब फिर गाइड लाइन की तैयारी शुरू होने वाली है।

ऐसे तैयार होगी गाइड लाइन

नई गाइड लाइन के लिए उपजिला मूल्यांकन समिति द्वारा सर्वे किया जाएगा। इसमें एक साल में हुई रजिस्ट्री के दस्तावेजों का औसत निकाला जाएगा। फिर रजिस्ट्रियों के आधार पर शहर के चुनिंदा इलाके जहां ज्यादा दाम पर रजिस्ट्री हुई है उनका सर्वे कर दाम तय किए जाएंगे। इसके बाद सर्वे रिपोर्ट उपमूल्यांकन समिति के सामने रखी जाएगी। उपमूल्यांकन समिति की रिपोर्ट को कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला मूल्यांकन समिति को भेजा जाएगा। इसके बाद दावे और आपत्ति बुलाई जाएगी। इसके बाद दाम केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजे जाएंगे। फिर गाइड लाइन लागू की जोगी।

इधर, अधिकार बदले

नए नियमों के तहत अब संभागायुक्त के अपील के अधिकार डीआईजी पंजीयन एवं मुद्रांक को दे दिए हैं। अभी तक स्टाम्प शुल्क की बकाया रकम जमा नहीं करने पर यह केस जिला पंजीयक के पास जाता था। यहां पर केस डिसाइड नहीं होने पर इसकी अपील संबंधित व्यक्ति संभागायुक्त के पास करते थे। पंजीयन विभाग के अफसरों का तर्क था कि संभागायुक्त के यहां पर महीनों केस की सुनवाई होती थी।

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