जीवन बदलने के लिए मान्यताएं बदलें
रतलाम | हमारे जीवन को बदलने के लिए सर्वप्रथम मान्यताओं को बदलना पड़ेगा। अनादिकाल से कुमान्यताएं हमारी बुद्धि में भरी हुई हैं। जिस प्रकार कचरे में हमारा घर दूषित बनता है उसी प्रकार कुमान्यताओं से हमारी बुद्धि दूषित बनती है। देश की सुंदरता के लिए यदि स्वच्छ भारत अभियान लगाया गया तो आत्मा के सौंदर्य को निर्माण के लिए स्वच्छ बुद्धि अभियान लगाना जरूरी है। यह बात शहर सराय स्थित पटवा निवास में साध्वी दिव्य प्रज्ञाजी ने कही। उन्होंने कहा सम्यक ज्ञान को ग्रहण करें और कुमान्यताओं को दूर करें। आत्मा का आत्मा के रूप में दर्शन कराना ही सम्यक दर्शन है। चौबीस घंटे हमारी नजर हमारी आत्मा पर होती है या शरीर पर।