जिनेंद्र मुनिजी के सान्निध्य में बड़वाह में 18 को 200 वर्षीतप आराधकों के पारणे
प्रवर्तक जिनेंद्र मुनिजी, अणुवत्स संयत मुनिजी, संदीप मुनिजी, अतिशय मुनिजी, गिरीश मुनिजी, रवि मुनिजी, आदित्य मुनिजी आदि के सान्निध्य में बड़वाह में 18 अप्रैल को 200 वर्षीतप आराधकों के पारणे का आयोजन होगा। श्री धर्मदास जैन श्रीसंघ के प्रवक्ता ललित कोठारी व पवन कुमार कांसवा ने बताया पारणा महोत्सव में रतलाम से भी कई श्रद्धालु शामिल होंगे। आयोजन कृषि उपज मंडी प्रांगण में बनाए गए अणु दरबार में होगा।
महोत्सव में मध्यप्रदेश के तपस्वियों के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान के अलावा अन्य प्रांतों के तपस्वी शामिल होंगे। कोठारी ने बताया वर्षीतप जैसी तपस्या करना साधारण बात नहीं है। तप अवधि में तपस्वी अनेक प्रकार के शारीरिक एवं मानसिक परिषहों को सहकर आधि-व्याधि से लड़ता हुआ अपनी तप यात्रा को निरंतर लक्ष्य की ओर गतिमान रखता है। तपाराधक अपनी तप यात्रा भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक चैत्र कृष्णा अष्टमी से देव, गुरु, धर्म की पावन निश्रा में आरंभ करता है और सम्यक श्रद्धा के साथ आगे बढ़ते हुए वैशाख शुक्ल तृतीया यानी अक्षय तृतीया पर समापन करता है। ऐसा तप अनुमोदनीय है और तपस्वी जनप्रशस्ति के योग्य है।
एक दिन पहले होगी चौबीसी
धर्मदास जैन श्रीसंघ के अध्यक्ष शैलेष पीपाड़ा, महामंत्री अरविंद मेहता और सचिव नरेंद्र गांधी ने बताया बड़वाह पारणा महोत्सव में जिले से भी तपस्वी शामिल होंगे। पारणे के एक दिन पहले 17 अप्रैल को वर्षीतप तपस्वियों के अनुमोदनार्थ चौबीसी का आयोजन बड़वाह स्थानक भवन में दोपहर 1.30 से 3.30 बजे तक महिला मंडल एवं बहुमंडल द्वारा होगा। 18 अप्रैल अक्षय तृतीया को सुबह 8.30 बजे से व्याख्यान एवं आलोचना विधि, सुबह 10.30 बजे वर्षीतप तपाराधकों का बहुमान एवं पारणा महोत्सव होगा। सुबह 11.15 बजे से साधर्मीवात्सल्य होगा।
2017 में रतलाम में हुआ था
अणु मित्र मंडल के अध्यक्ष विनय लोढ़ा, महामंत्री राजेश कोठारी और सचिव मिलिन गांधी ने बताया प्रवर्तक जिनेंद्र मुनिजी के सान्निध्य में वर्षीतप पारणा महोत्सव वर्ष 2012 में उज्जैन में, वर्ष 2013 में पेटलावद, वर्ष 2014 में दाहोद गुजरात में, वर्ष 2015 में बदनावर, वर्ष 2016 में नागपुर महाराष्ट्र व वर्ष 2017 में रतलाम मध्यप्रदेश में हो चुके हैं। 2012 के पहले आचार्य उमेश मुनिजी के सान्निध्य में वर्षीतप पारणा महोत्सव होता आ रहा था।