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अधिक मास का समय भगवत सेवा, पाठ व चिंतन का लाभ लेने में बीतना चाहिए

3 वर्ष पहले
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श्री स्वामी बुद्घ देव भक्त मंडल धार्मिक ट्रस्ट द्वारा टाटा नगर स्थित श्री बुद्घेश्वर आश्रम गोपाल सत्संग हॉल में तीन दिवसीय श्री पुरुषोत्तम मास की महिमा-सत्संग का आयोजन हुआ। इसमें अहमदाबाद से पधारे कथा वाचक भागवत ऋषि के मुखारविंद से अमृत प्रवचन हुए।

पहले दिन भागवत ऋषि ने कहा अधिक मास में सकाम कर्म नहीं निष्काम कर्म ही किए जा सकते हैं। अधिक मास में हमारा समय भगवत सेवा, भगवत पाठ और भगवत चिंतन का लाभ लेने में बीतना चाहिए। कभी तो ऐसा समय चाहिए जब हम सही मायनों में वैष्णव बने, इसके लिए पुरुषोत्तम मास सर्वश्रेष्ठ है। इस माह भगवान की प्रसन्नता के लिए कर्म करना चाहिए। वैष्णव होने के नाते हम जो चर्चा करें, भागवत के ईद-गिर्द करें। श्रीमद् भागवत ही हमारा मूल, प्रेरणा और स्रोत होना चाहिए। बुद्घि तब आती है जब शुद्घता आती है। बिना शुद्घता बुद्घि नहीं आती। भगवान रूठ जाएं तो गुरु ही पर्याप्त है। गुरु रूठ जाएं तो ब्रम्हा, विष्णु और महेश मिलकर भी मना नहीं सकते। गुरु को देखना है तो चैतन्य मूर्ति के रूप में देख सकते हैं यदि भौतिक रूप से देखेंगे तो दोष दिखाई देगा। गुरु चाहते हैं कि हम उनके दिखाए मार्ग पर चलकर भगवान का यशगान करें तब गुरु प्रसन्न होते हैं। संतश्री का पुष्पमालाओं से स्वागत अध्यक्ष चैतन्य कुमार झालानी, डॉ. अजय पंडित, महेंद्रसिंह सिसौदिया, दिनेश त्रिवेदी, राकेश मादी, दीपक तनपुरे, कमल मालवीय, कैलाश प्रजापति आदि ने किया।

प्रवचन देते भागवत ऋषि।

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