कथा का वाचन करते स्वामी चिदंबरानंद व उपस्थित श्रद्धालु।
भास्कर संवाददाता | रतलाम
देश में राक्षस, दैत्य और पिशाच हुए लेकिन उन्होंने दुराचार नहीं किए लेकिन इंसान को आज क्या हो गया जो मासूम बच्चियों के साथ हैवानियत कर हत्या में भी उसे शर्म और भय नहीं है। जब तक भोग वृत्ति को भगवती वृत्ति में नहीं बदला जाएगा ऐसे जघन्य अपराध नहीं थमेंगे। आज सबसे बड़ी आवश्यकता दूषित मानसिकता, विचारधारा और शिक्षा पद्धति में परिवर्तन की है।
यह बात महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानंद सरस्वती जी ने श्रीमद् देवी भागवत कथा में चौथे दिन कही। श्रीहरिहर सेवा समिति एवं भट्ट परिवार ने कालिका माता गरबा प्रांगण में आयोजित कथा में आयोजक मोहनलाल भट्ट, श्यामा भट्ट, पातीराम शर्मा, विजय कौशल ने पोथी पूजन किया। स्वामीजी ने कहा दुनिया में केवल एकमात्र सनातन संस्कृति है, जहां नारी को मां भगवती के रूप में पूजा जाता है। शक्ति की आराधना का विशेष महत्व है पाश्चात्य संस्कृति के स्थान पर हमारी इसी संस्कृति को यदि महत्व दिया जाता तो आज समाज में दुराचार की शर्मिंदगी भरी घटनाएं नहीं होती। किसी एक की भी मानसिकता विकृत होती है तो उसके दुष्परिणाम समाज को भुगतना पड़ता है। कन्याओं के प्रति आदरपूर्ण भगवती वाली भावना बने न कि भोगवादी। हमारे साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि हम धर्म-कर्म सब करते है लेकिन मनमाने तरीके से, इस कारण हमें उसका मनोवांछित फल नहीं मिल पाता है। देवी भागवत की आरती एवं स्वागत वित्त आयोग अध्यक्ष हिम्मत कोठारी, चंदन पिरोदिया, सुरेश गौरेचा, भगवान भाई, डॉ. भरत कुंपावत, डॉ. डी.सी. राठौर आदि ने किया।