श्रीमद् भागवत ऐसा अद्भुत ग्रंथ है जो प्रत्येक जीव के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। इसमें प्रत्येक जीव को ज्ञान का अधिकारी बताते हुए उसे प्राप्ति का मार्ग बताया है। इसलिए जब भी अवसर मिले इसका श्रवण करना चाहिए। भागवत श्रवण से जीव की सहज मुक्ति होती है। अधिकमास में इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
यह बात अखंड ज्ञान आश्रम में भानपुरा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंदजी तीर्थ ने कही। ब्रह्मलीन स्वामी ज्ञानानंद महाराज के स्मरण में आश्रम में शनिवार से कथा की शुरुआत महामंडलेश्वर स्वामी स्वरूपानंदजी महाराज की अध्यक्षता में हुई। दिव्यानंदजी तीर्थ ने कहा पुरुषोत्तम मास में भगवान के श्रीमुख से दिए वचनों का श्रवण परम पुण्य का फल है। सनातन सर्व मांगल्य की कामना करता है। भगवान वेदव्यास ने कहा सत्यम परम धीमहि... हमें भी उसी सत्य पाने का प्रयास करना चाहिए। जिसने सत्य की खोज की उसे सत्य की उपलब्धि होती है। सत्य जाने बगैर कोई पूर्ण तत्व को नहीं पा सकता है। उन्होंने कहा राम जी इस देश के अराध्य और आदर्श है, उन्होंने एक राजा के रूप में त्याग, बलिदान, आज्ञा पालन, अनुशासन आदि का समाज को पाठ पढ़ाया। एक राजा राष्ट्र के कल्याण के लिए क्या कुछ त्याग कर सकता है इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है प्रभु श्री राम। हम सभी को उनसे प्रेरणा लेना चाहिए। आश्रम के सह संचालक स्वामी देवस्वरुपानंदजी ने बताया श्रद्धालु रोज शाम 4 बजे से कथा सुनने का लाभ ले सकते हैं। दिव्यानंदजी तीर्थ का आश्रम ट्रस्ट एवं परिवार की ओर से स्वामी सुजनानंदजी, यजमान जितेंद्र पुरोहित, कमला पुरोहित, कैलाश जाट, सतीश पुरोहित, राजेंद्र वाघेला आदि ने सम्मान किया।