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अगर संशय दूर नहीं किया तो वह हमारे साथ चिता तक जाएगा

3 वर्ष पहले
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रामकथा सुनने से हमारे संशय दूर होते हैं। यदि कोई संशय मन में आ जाए तो पूछकर दूर कर लेना चाहिए। संशय दूर नहीं किया तो वह हमारे साथ चिता तक जाएगा। यदि कोई व्यक्ति प्रश्न पूछता है तो एक क्षण के लिए मूर्ख रहता है पर जो नहीं पूछता वह जीवनभर मूर्ख बना रहता है। आत्मा और परमात्मा में कोई अंतर नहीं है यही ज्ञान है। हृदय के अंदर निर्मल विवेक तब तक नहीं हो सकता जब तक हम गुरु से कुछ छुपा कर रखेंगे। हमें गुरु से कुछ नहीं छुपाना चाहिए।

यह बात भानपुरा पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंदजी तीर्थ ने रामायण मेले के तीसरे दिन कही। पूर्व धर्मस्व मंत्री स्व. पं. मोतीलाल दवे द्वारा स्थापित 37वां रामायण मेले में जड़वासा खुर्द में प्रवचन हो रहे हैं। उन्होंने कहा जीवन में मनुष्य चार प्रकार के कर्म करता है। व्यर्थ, अनर्थ, स्वार्थ और परमार्थ। भारतशील देश के विकास के लिए धन, शक्ति और समय दुर्लभ वस्तुएं हैं हम इन्हें व्यर्थ में नहीं गंवा सकते। समय जैसी मूल्यवान वस्तु को काम नहीं करके, गप्पे मार के और ताश खेलकर टाइम पास कर नष्ट नहीं करना चाहिए। ओलंपिक रेस में जिसको स्वर्ण पदक मिला उससे हमारे देश की पीटी ऊषा का एक कदम पीछे रह गया था जो कवल एक सेकंड का फासला था। जीवन में एक सेकंड की भी बहुत बड़ी कीमत होती है इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। आज दूसरों का बुरा चाहने का भाव मनुष्य में बहुत पनप रहा है ये अनर्थ है। हमारे जीवन में इस अनर्थ का परिणाम क्या होगा यह सोचना चाहिए। स्वार्थी बुरे नहीं होते हैं। स्वार्थी किसी का बुरा नहीं चाहते केवल अपना भला चाहते हैं। ऐसे लोग बुरे नहीं होते पर श्रेष्ठ भी नहीं होते है। श्रेष्ठ तो केवल परमार्थी होता है। सभी के निरोगी होने की कामना करने वाला, चारों तरफ अच्छाई ही अच्छाई की प्रार्थना और सब के सुख में अपना सुख मानने वाला ही परमार्थी है। मानस मर्मज्ञ पं. अखिलेश उपाध्याय ने राम नाम की माला जपेगा जो कोई दिल वाला... भजन सुनाया। उन्होंने कहा राम कथा यदि भोजन की तरह है तो हरिनाम ही तुलसी दल की तरह है। कार से व्यक्ति बड़ा हो सकता है लेकिन संस्कार से व्यक्ति महान होता है। आपका बेटा आपको रोज राम का पाठ करते देखेगा, सत्संग में जाते देखेगा तो एक दिन वह पाठ भी करेगा और सत्संग में भी जाने लगेगा।

रामायण मेले में दोनों हाथ उठाकर भरपूर वर्षा के लिए प्रार्थना करते हुए श्रद्धालु व प्रवचन देते हुए स्वामी दिव्यानंदजी। फोटो | भास्कर

आज के युग में अमृत कहीं मिलता है तो वह सत्संग है - मिश्र

मानस मंजरी चंदा मिश्र ने कहा आज के युग में अमृत कहीं मिलता है तो वह सत्संग है। भगवान की कथा में संतों की वाणी से अमृत झलकता है। सत्संग रूपी अमृतपान करने से जीवन के सारे कष्ट मिट जाते है। पोथी पूजन व संतो का पुष्पमालाओं से स्वागत मेला संयोजक पं. राजेश दवे, अनिता दवे, भव्या दवे, आंकाक्षा दवे, यशोदा पाटीदार ने किया। पादुका पूजन कालूराम पटेल (सप|ीक) ने किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने दोनों हाथ उठाकर भरपूर वर्षा के लिए प्रार्थना की। संचालन ध्रुव पारखी ने किया।

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