दस करोड़ रुपए से अधिक के राशन घोटाले में आरोपी तत्कालीन स्वास्थ्य अधिकारी राजेंद्रसिंह पंवार की जमानत याचिका शुक्रवार को खारिज हो गई। प्रकरण के अन्य आरोपियों की जमानत होने पर बचाव पक्ष के अभिभाषक ने न्यायालय से समानता के आधार पर आरोपी पंवार को भी जमानत का लाभ देने की अपील की थी। अपर सत्र न्यायाधीश साबिर अहमद खान ने फैसले में लिखा कि जांच में पाया गया है कि योजनाबद्ध तरीके से समग्र परिवारों को मिलने वाले राशन के गबन के लिए प्रक्रिया में छेड़छाड़ की गई। अन्य आरोपियों के मुकाबले निगम के प्राधिकृत अधिकारी पंवार की भूमिका भिन्न है, इसलिए जमानत अर्जी खारिज की जाती है।
बचाव पक्ष के अभिभाषक ने 15 मई को प्रस्तुत आवेदन में बताया कि तत्कालीन निगम आयुक्त ने 26 दिसंबर 2012 को समग्र सामाजिक सुरक्षा सर्वे कार्यक्रम के अंतर्गत तत्कालीन प्रभारी उपायुक्त राजेंद्र कोठारी को चार्ज अधिकारी नियुक्त किया था। लिपिकीय कार्य की जिम्मेदारी रामचंद्र शर्मा की थी। जिस कमरे में काम हो रहा था उसके बिजली और इंटरनेट कनेक्शन तथा बैठक की देखरेख का काम आरोपी राजेंद्र पंवार के जिम्मे था। कम्प्यूटर की डाटा एंट्री से उनका संबंध नहीं था न ही पंवार ने किसी पात्रता पर्ची पर हस्ताक्षर किए। पात्रता पर्चियां नगर निगम की देखरेख में कम्प्यूटर विभाग के ठेकेदार यशवंत गर्ग ने कम्प्यूटर में जानकारी फीड कर नगर निगम और खाद्य विभाग में जनरेट की। खाद्य विभाग के अधिकारी ने संतुष्ट होकर हस्ताक्षर किए और दूसरे हस्ताक्षर तत्कालीन राशनकार्ड प्रभारी रवींद्र ठक्कर ने किए। पंवार ने शासकीय उचित मूल्य की दुकान से न कोई राशि प्राप्त की और न ही आर्थिक लाभ लिया। प्रकरण दर्ज हुए चार माह से अधिक समय बीत चुका है। आरोपी पंवार के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है।
निरीक्षण की जिम्मेदारी स्वास्थ्य अिधकारी पंवार की थी
लोक अभियोजक सुभाष जैन ने बताया कलेक्टर के आदेश पर एसडीएम ने जांच कर 62 पेज का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है जिसमें आठ सहकारी समितियों द्वारा संचालित प्राथमिक उपभोक्ता भंडार से 10 करोड़ से अधिक के राशन की हेरफेर हुई है। प्रतिवेदन के अनुसार नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग द्वारा समग्र परिवार आईडी बनाने का काम तत्कालीन स्वास्थ्य अधिकारी राजेंद्रसिंह पंवार तथा स्वास्थ्य निरीक्षक रवींद्र ठक्कर के निर्देशन में हुई। सहायक आयुक्त ने पत्र में आरोपी राजेंद्र को भी जिम्मेदार ठहराया है। 24 दिसंबर 2012 को जारी कलेक्टर के आदेश पर सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम के तहत हितग्राहियों की जानकारी एकत्र करने के लिए कमिश्नर सोमनाथ झारिया ने 26 दिसंबर 2012 को राजेंद्रसिंह पंवार को कंट्रोलरूम प्रभारी नियुक्त किया था। समस्त कार्य के निरीक्षण की जिम्मेदारी भी उनकी थी। नगर निगम द्वारा दी गई जानकारी में स्वास्थ्य विभाग के रवींद्रसिंह और रवींद्र ठक्कर को जिम्मेदार बताया है। न्यायाधीश साबिर अहमद खान ने माना कि समग्र आईडी परिवारों का सत्यापन कर फर्जी रूप से आईडी बनाने और एक परिवार की आईडी से अन्य परिवारों को लिंक करना नगर निगम द्वारा नियुक्त प्राधिकृत अधिकारी के बगैर संभव नहीं था। प्रकरण के अन्य आरोपी खाद्य अधिकारी आर.सी. जांगड़े, वंदना बाबेरिया को जमानत का लाभ दिया है। उनका कृत्य मात्र जारी की गई पात्रता पर्ची के अनुक्रम में खाद्य पदार्थ के आवंटन और वितरण का रहा जो आरोपी राजेंद्रसिंह के कृत्य से भिन्न है। इसलिए जमानत का लाभ देना उचित नहीं है।