भगवान शंकर भी महाऋषि अगस्त से कथा श्रवण करने गए थे जबकि कथा तो भगवान शंकर ने ही रची थी। भगवान ने कथा श्रवण कर संसार को यह बताया कि देवता हो या मनुष्य, सभी को कथा श्रवण का लाभ लेना चाहिए। धर्म का अर्थ केवल उपासना नहीं है। रावण से बढ़कर कोई उपासक नहीं लेकिन परनारी का हरण करने वाले ऐसे उपासक रावण को हम धर्मात्मा नहीं कह सकते।
यह बात भानपुरा पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंदजी तीर्थ ने 37वें अभा रामायण मेले के दूसरे दिन कही। पूर्व धर्मस्व मंत्री स्व. पं. मोतीलाल दवे द्वारा स्थापित रामायण मेले का आयोजन जड़वासा खुर्द में किया जा रहा है। स्वामी दिव्यानंदजी ने धर्मात्मा व उपासक के लक्षण बताते हुए कहा जो धर्मात्मा होगा, वह उपासक हो जाएगा। उपासक धर्मात्मा हो, यह जरूरी नहीं। संसार में रावण जैसा उपासक कोई नहीं हुआ। हम भगवान को पुष्प चढ़ाने में कंजूसी कर दें लेकिन रावण ने सिर काट कर भगवान शंकर को चढ़ाए लेकिन परनारी का हरण करने वाले को धर्मात्मा नहीं कह सकते। आचरण हीन व्यक्ति को वेद भी पवित्र नहीं कर सकते। हनुमानजी धर्मात्मा भी हैं और उपासक भी। उन्होंने श्रीराम की सेवा को धर्म समझा और कर्तव्य भी।
श्रीमद भागवत कथा का वाचन करते हुए स्वामी दिव्यानंदजी व उपस्थित श्रद्धालु।
सारे संसार का पेट भरने वाला परमात्मा केवल भाव का भूखा है
मानस मर्मज्ञ पं. अखिलेश उपाध्याय ने कहा हमारा शरीर प्रभु के कीर्तन के लिए मिला है। चौरासी लाख योनियों में सभी जीव भोजन करते हैं लेकिन भजन केवल मनुष्य करता है। जगत कर्म का और जगन्नाथ आसु का विषय है। जिस परमात्मा ने अनंत के प्रतिक धरती, आकाश और समुद्र बनाया हम उसे क्या दे सकते हैं। सारे संसार का पेट भरने वाला परमात्मा केवल भाव का भूखा है। हम उस परमात्मा को भजन से कीर्तन से और भाव से संतुष्ट कर सकते हैं। तर्क केवल जगत के लिए है तर्क जगन्नाथ के लिए नहीं है। शरीर का आदि नाम है नर और नर के बाद नारायण की स्थिति है। मानस मंजरी चंदा मिश्र ने सुमधुर भजनों के साथ कहा भगवान के भजन से मन सुंदर और अंतःकरण पवित्र हो जाता है। पोथी पूजन व संतों का पुष्पमालाओं से स्वागत मेला संयोजक पं. राजेश दवे, अनीता दवे, जड़वासा खुर्द भव्या दवे, आंकाक्षा दवे, शोभा पंवार हरिराम पाटीदार, बाबूलाल बांगलिया, बापूसिंह घोटा, रमेश कारपेंटर, तुलसीराम पटेल, राकेश जोशी आदि ने किया। पादुका पूजन चंद्रसिंह पंवार ने किया। श्रद्धालुओं ने दोनों हाथ उठाकर भरपूर वर्षा के लिए प्रार्थना कर रामायणजी की आरती की। संचालन ध्रुव पारखी ने किया।