डर का सामना करेंगे, भय हमसे कोसों दूर भाग जाएगा
रतलाम | हम अपने जीवन में निर्भय कैसे बनें। निर्भयता से ही जीवन में सफलता मिलती है। भय तो एक कल्पना है जिसका हम बार-बार आह्वान करते हैं। वो तो हमारे संकल्पों का एक बीज है जो हम खुद बोते हैं। इसे हमें ही समाप्त करना होता है। जब तक हम अपने अंदर के डर को खत्म नहीं करेंगे तब तक जीवन में आगे नहीं बढ़ पाएंगे। अगर हम डर का निर्भय होकर सामना करते हैं तो यह भय हमसे कोसों मिल दूर भाग जाता है। यह बात राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी किरण दीदी ने डोंगरा नगर संस्कार केंद्र में आयोजित समर कैंप में कही। पंडित जवाहरलाल नेहरू का उदाहरण देते हुए जब वे कैंब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ते थे तब उन्हें भाषण करने में बहुत डर लगता था। वे जुर्माना देने के लिए तैयार थे लेकिन भाषण नहीं करते थे। धीरे-धीरे वे डर को खत्म कर अपने समय के बहुत बड़े वक्ता बन गए। शिविर में बच्चों को आर्ट एंड क्रॉफ्ट भी सिखाया गया।