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13 गांव के 20 हजार से ज्यादा लोगों के लिए परेशानी बना टायर फैक्टरी से निकल रहा धुआं

3 वर्ष पहले
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जड़वासा कलां से बांगरोद रोड के बीच संचालित एक कारखाना 13 गांवों के 20 हजार से ज्यादा रहवासियों की सेहत के लिए नुकसानदायक बन गया है। इसमें पुराने टायरों काे जलाकर ऑइल बनाया जाता है। बदबूदार धुआं फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। एक किसान ने खेत में डॉलर चने की उपज ली, बाजार में भाव 7 हजार रुपए प्रति क्विंटल है लेकिन किसान को मिले 2 हजार रुपए क्विंटल। कारण, धुएं से चने का रंग काला पड़ गया था और कड़वाहट आ गई थी।

पांच साल से टायर फैक्टरी चल रही है। क्षेत्रे के लोगों ने मामले में प्रभारी मंत्री दीपक जोशी और कलेक्टर रुचिका चौहान से शिकायत की। एसडीएम ग्रामीण नेहा भारती ने निरीक्षण किया। धुएं के कारण जडवासा कलां, बांगरोद, जडवासा खुर्द, बाजनखेड़ा, मलवासा ,कलोरी, सिमलावदा खुर्द, ऊंचाहेड़ा, हतनारा, रिंगनिया, कनवास, हेमती, नायन सहित 13 गांव के रहवासी किसान प्रभावित हो रहे हैं।

खेत और मजदूरों की खराब हालत।

लोगों की शिकायत

फैक्टरी से निकलने वाले धुएं के कारण चेहरे और नाक में कार्बन जम जाता है। फूड पॉइजनिंग, थकावट, मितली, तेज सिर दर्द, हृदय व सांस संबंधित बीमारियां बढ़ रही हैं। पहले से लाल पानी की समस्या से ग्रस्त गांवों के खुले जलस्रोतों का पानी काला होने लगा है।

ग्रामीणों का दर्द

जड़वासा कलां के पिंटू पाटीदार का कहना है फसल के दाने काले या कमजोर होने से चने की फसल के दाम सही नहीं मिले। बिल व फसल के नमूने के साथ प्रभारी मंत्री, कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार व एसपी से शिकायत की है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी शिकायत भेजी है।

जगदीश पाटीदार निवासी जड़वासाकलां के अनुसार फैक्टरी से निकलने वाले धुएं के कारण आसपास के तालाबों का पानी काला हो गया है। सब्जियां खाने लायक नहीं रही, खेतों मे मजदूर काम करने को तैयार नहीं हैं।

- विनोद पाटीदार के अनुसार गांव मे सांस लेना दूभर हो गया है। हमारी कोई नहीं सुन रहा है, मामला कोर्ट मे ले जाएंगे।

जांच करवाकर निराकरण करेंगे

फैक्टरी के प्रदूषण संबंधी शिकायत मिली है, कलेक्टर को बताया है। जांच करवाकर उचित निराकरण कराएंगे। सोमेश मिश्रा, जिपं सीईओ

मामला मेरी जानकारी में है। स्थल का निरीक्षण कर लिया है। जल्द निराकरण करेंगे। नेहा भारती, एसडीएम रतलाम ग्रामीण

जरूरी कदम उठाए हैं

किसानों की शिकायतों काे ध्यान में रखते हुए हमने जरूरी कदम उठाए है, समस्या का 70 प्रतिशत तक निराकरण हो गया है। हमारे पास पर्यावरण प्रदूषण विभाग की अनुमति, जमीन का डायवर्शन व अन्य जरूरी स्वीकृतियां है। विजय देवड़ा, फैक्ट्री सुपरवाइजर

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