भगवान कहीं भी नहीं गए हैं, हमारा भरोसा चला गया है। आज जरूरत भगवान और धर्म पर धैर्यपूर्वक अटल विश्वास की है। धर्म करने वाले का कभी अहित नहीं होता है। सनातन मंच से दिए गए उपदेश को यदि निष्ठापूर्वक आचरण में आत्मसात किया जाए तो हर घर मंदिर बन जाएगा। इस यथार्थ को कोई भी मिटा नहीं सकता है।
यह बात श्रीमद् देवी भागवत कथा के तीसरे दिन कालिका माता गरबा प्रागंण में महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानंद सरस्वतीजी ने कही। उन्होंने कहा हमें अपनी गौरवशाली संस्कृति को समझना होगा। इस संस्कृति को बचाने की हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। देश, धर्म और संस्कृति के विरुद्ध कार्य करने वालों का प्रतिकार करना ही होगा। उन्होंने कहा हमारी संस्कृति हमें अतिथि देव का पाठ सिखाती है लेकिन आज विकृत मानसिकता के कारण हम अपने माता-पिता और महात्मा में भी देव दर्शन नहीं कर पाते हैं। देवत्व बुद्धि का विकास शक्ति की आराधना से होता है। मां भगवती के नाम से भय पैदा करने का प्रयास सर्वथा अनुचित है। जगतजननी मां तो सारे जगत का स्नेहपूर्वक पालन करती है। उन्हें प्रेमपूर्वक भजना चाहिए। मां हजारों अपराधों को माफ करती है। भगवती कभी नाराज नहीं होती है, वे तो सदैव कृपा करती हैं। मां की आंखों में करुणा ही समाई है। उन्होंने कहा कलियुग में पाप हरने में हरिनाम के स्मरण के अलावा कोई दूसरा साधन नहींं है। प्रभु का स्मरण उनकी कथा और लीलाओं के श्रवण से निरंतर बना रहता है। यह अद्भुत संयोग प्रभु ने हमें अधिक मास के रूप में दिया है। संसार का ऐसा कोई सुख नहीं जिसके साथ दु:ख नहीं हो। कोई भी साधन स्थायी सुख नहीं दे सकता है। भागवत धाम अहमदाबाद के भागवत ऋषि ने कहा जीवन की सारी समस्याओं और सवालों का समाधान श्रीमद देवी भागवत को सुनने से स्वत: प्राप्त हो जाते हैं। श्रीहरिहर सेवा समिति एवं भट्ट परिवार द्वारा आयोजित कथा में आयोजक मोहनलाल भट्ट व श्यामा भट्ट, रामेश्वर खंडेलवाल ने श्रीमद् देवी भागवत जी पोथी का पूजन किया। संचालन सुनील भट्ट ने किया।
कथा सुनाते स्वामी चिदंबरानंद