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पौंग व भाखड़ा में 14 साल बाद सबसे कम हुआ जलस्तर गंगनहर को अभी मिलता रहेगा 2 हजार क्यूसेक पानी

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता|हनुमानगढ़/रावलामंडी

बांधों के गिरते जलस्तर ने आखिरकार आईजीएनपी में नौ साल पुराना रेगुलेशन लागू करवा दिया है। मंगलवार को चंडीगढ़ में हुई बीबीएमबी की बैठक में प्रदेश के हिस्से का पानी तय हो गया। इसके अनुसार आईजीएनपी में 6100 क्यूसेक पानी चलाकर चार में से एक ग्रुप चलाया जाएगा। गौरतलब है कि 2002, 2004 और 2009 में ही चार में से एक ग्रुप चलाने की नौबत आई थी। इसके बाद कम से कम तीन में एक ग्रुप चलाकर किसानों को पानी दिया जाता रहा। जलसंसाधन विभाग के मुख्य अभियंता केएल जाखड़ ने बताया कि पौंग बांध में 1335 फीट का लेवल होने पर 21 सितंबर के बाद के डिप्लीशन पीरियड में पेयजल देना संभव होता है। अभी बांध का लेवल 1320 फीट से नीचे ही चल रहा है। इस कारण सभी हिस्सेदार राज्याें के पानी मेंे कटौती की जा रही है। बीबीएमबी की बैठकें हर सप्ताह हो रही हैं और बारिश के पानी का समुचित उपयोग करने की सलाह दी गई है। नदियों में घटी पानी की आवक के कारणों की जांच नेशनल हाइड्रोलॉजी इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक भी कर रहे हैं। उधर, माकपा के पूर्व विधायक पवन दुग्गल ने कम पानी देने पर कड़ा आक्रोश जताया है।

वजह... मानसून में बारिश की कमी और गर्मी में तापमान नहीं बढ़ने से पहाड़ों की बर्फ नहीं पिघलना से पानी घटा

भास्कर पड़ताल

आईजीएनपी में चार में से एक समूह चलने पर किसी नहर के बंद होने के 32.5 दिन बाद किसान को पानी मिल पाएगा। उदाहरण के लिए अभी मुख्य रूप से कंवरसैन लिफ्ट, साहवा लिफ्ट, पूगल ब्रांच, रोजड़ी वितरिका आदि को पानी दिया जा रहा है। यह नहरें दस अगस्त शाम को बंद होंगी। इसके बाद इन्हें करीब एक माह बाद ही पानी मिल पाएगा। अब ग्रुप भी तीन की बजाय चार होंगे इसलिए वरीयता में चलने वाली नहर पर सबकी नजर है। हनुमानगढ़ क्षेत्र के किसानों को उम्मीद है कि पहली वरीयता में रावतसर व नौरंगदेसर को शामिल किया जाएगा क्योंकि पिछले रेगुलेशन में यही नहरें पहली वरीयता में थी। नई व्यवस्था में इन नहरों के साथ पहली वरीयता में रही अनूपगढ़ वितरिका को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए सभी की नजर नहरों की वरीयता पर ही टिकी हुई है।

भास्कर ने पहले ही बता दिया था चार में से एक ग्रुप में पानी देने की तैयारी कर रहा है विभाग।

किसानों की बड़ी चिंता: खरीफ की फसलों पर मंडरा रहा है संकट

इस साल क्षेत्र के किसान दोहरी परेशानी से गुजर रहे हैं। मानसून के दौरान कम बारिश के बाद अब नहरी पानी की कमी से फसलें बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं। नरमा-कपास के लिए जल्द सिंचाई पानी की आवश्यकता होगी। किसान नेता ओम जांगू ने बताया कि रावतसर व नौरंगदेसर वितरिका को पहली वरीयता में चलाया जाता है तो स्थिति कुछ सुधर सकती है। उन्होंने कहा कि अनूपगढ़ और रावतसर व नौरंगदेसर में चयन की बात आए तो अधिकारियों को रावतसर व नौरंगदेसर को चुनना चाहिए क्योंकि अनूपगढ़ क्षेत्र में पहले ही कम बिजाई हुई है। दोनों सिस्टम एक साथ चल पाएं तो सभी किसानों को फायदा मिलेगा लेकिन उपलब्ध पानी की मात्रा को देखते हुए यह संभव नहीं लगता।

परेशानी यह भी: पानी नहीं मिला तो रबी में भी बुवाई की होगी समस्या

जलसंसाधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1996 के बाद बांधों का स्तर एक बार ही इतना नीचे गया है। 2004 में बांधों का स्तर वर्तमान से नीचे था लेकिन इसके अलावा कोई भी साल ऐसा नहीं गया जब आवक व लेवल इतना कम रहा हो। 2004 में हालात काफी विकट थे और घड़साना आंदोलन की शुरुआत भी उस समय पानी की किल्लत से ही हुई थी। जानकारों के मुताबिक खरीफ सीजन तो निकल चुका है लेकिन बांधों के स्तर में सुधार नहीं होता है तो असली समस्या रबी सीजन में खड़ी होगी। उस समय खेती पूरी तरह से नहरी पानी पर निर्भर करती है। ऐसे में विशेषज्ञों और किसानों को अभी से विकल्प पर विचार करना होगा।

सबसे ज्यादा दिक्कत आईजीएनपी इलाके में, 4 में से 1 समूह में पानी मिलेगा

असर...हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर में 2 लाख हेक्टयेर में नरमा-कपास की फसल के खराब होने का अंदेशा, सभी राज्याें का पानी का हिस्सा कम होगा

बांधों का जलस्तर

बांध 2018 2017

पौंग 1319.76 1362.66

भाखड़ा 1576.36 1641.28

रणजीत सागर 510.54 522.95

*लेवल सात अगस्त को, भाखड़ा व पौंग फीट व रणजीत सागर मीटर में

पानी की मात्रा

नहर पानी

आईजीएनी 6100

गंगनहर 2000

भाखड़ा 1200

सिद्धमुख 450

खारा 250

आईजीएनपी के पानी में कटौती हुई है वहीं भाखड़ा व गंगनहर के किसानों को पर्याप्त पानी मिल पाएगा। पानी की मात्रा क्यूसेक में

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