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जिले के 171 से अधिक सरकारी स्कूल जर्जर छुटि्टयों में भी नहीं कराई जा रही मरम्मत

3 वर्ष पहले
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एजुकेशन रिपोर्टर | बिलासपुर

बिल्हा के 130 सरकारी स्कूलों के अलावा जिले के अन्य जगहों के 41 सरकारी स्कूल भवन रखरखाव के अभाव में जर्जर हो गए हैं। स्कूलों की छुट्टियां होने के बाद भी इन भवनों की मरम्मत का काम नहीं कराए जाने से बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जबकि हाई व हायर सेकंडरी स्कूल भवन की मरम्मत की जिम्मेदारी राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा मिशन (आरएमएसए) के अफसरों की है। विभाग के पास ना तो जिले के जर्जर स्कूलों की संख्या और ना ही इनकी मरम्मत के लिए शासन से मिलने वाली राशि का रिकाॅर्ड है। बिलासपुर जिले के मस्तूरी, बिल्हा, कोटा, तखतपुर, गौरेला, पेंड्रा, मरवाही के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे जर्जर भवन में बैठने को मजबूर हैं। इसकी मूल वजह स्कूल भवनों का मेंटेनेंस नहीं कराया जाना है। शहर के ज्यादातर सरकारी स्कूल की छत का मेंटेनेंस नहीं किया जा रहा है। कहीं पंखे काफी समय से बंद हैं तो कहीं अन्य दूसरी परेशानी है। गर्मी की छुट्‌टी के बावजूद जर्जर स्कूलों का मरम्मत नहीं कराई जा रही है और न ही सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कई स्कूलों में छत के अलावा कमरे के टाइल्स, स्टूडेंट्स टॉयलेट, इलेक्ट्रॉनिक सामान का अभाव है। यहां तक कि स्कूल में रंग-रोगन भी नहीं कराया जा रहा है।

इन स्कूलों में ध्यान देने की जरूरत

हाई व हायर सेकेंडरी स्कूल- बैमा, बहतराई, लिंगियाडीह, सेलर, कन्या सीपत, झलमला, सोन, हिर्री, बेलपान, दैजा, कन्या सकरी, लिम्हा, जूनापारा, तेंदुआ, धूमा, धौराभाठा, करैहापारा, कर्रा, परसदा, सारधा, बिटकुली, भटचौरा, सोंठी, मल्हार, दर्राभांठा, भरनी हैं। सूरजमल बिल्हा, कन्या स्कूल बिल्हा, चांटीडीह, बिजौर, डंगनिया, बालक मस्तूरी, खम्हरिया, गतौरा, बालक सीपत, बालक सकरी, गनियारी, करगीकला, खोंगसरा, डीकेपी कोटा, कन्या कोटा।

जिले के 682 स्कूलों में बिजली नहीं

23 प्राइमरी स्कूल

127 मिडिल स्कूल

14 हाईस्कूल

18 हायर सेकंडरी

20 स्कूल मरम्मत के लायक हैं

जिले में जर्जर स्कूलों का कोई रिकाॅर्ड नहीं है। मेरे जानकारी में 15-20 स्कूल मरम्मत करवाने लायक हैं। आरएमएसए के अधीन स्कूलों की मरम्मत पीडब्ल्यूडी से करवाते हैं। इसके लिए बजट अलग से नहीं मिलता। -मनोज राय, अारएमएसए शिक्षा विभाग बिलासपुर

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