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स्कूल में बच्चों से फीस मांगी तो मान्यता निरस्त

3 वर्ष पहले
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रावतभाटा। अब कोई भी स्कूल प्रधान या शिक्षक स्कूल की फीस जमा कराने के लिए किसी भी बच्चे पर दवाब नहीं डाल सकेगा।

कारण है कि शिक्षा निदेशालय बीकानेर के उपनिदेशक ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इसकी पालना सुनिश्चित कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। चित्तौडगढ़ जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक हेमंतकुमार द्विवेदी ने बताया कि सहायक शासन सचिव स्कूल शिक्षा विभाग राजस्थान, प्रियंक कानूनगो सदस्य, बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई दिल्ली द्वारा 12 फरवरी 2018 को जारी पत्र में कहा गया है कि निजी विद्यालयों में फीस जमा नहीं कर पाने वाले बच्चे को स्कूल प्रबंधन द्वारा अन्य बच्चों के सामने प्रताड़ित किया जाता है। कई बार ऐसा होने पर बाल मन पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है और वह हीनभावना से ग्रसित हो जाता है। इसके चलते कई बार बच्चे आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। इस संबंध में कई घटनाएं समाज में घटित हुई हैं। इसके चलते शिक्षा विभाग ने यह कड़ा कदम उठाया है। डीईओ द्विवेदी ने बताया कि स्कूल की फीस जमा कराने की बात स्कूल प्रबंधन बच्चों के अभिभावकों के साथ ही कर सकते हैं। साथ ही स्कूल प्रबंधन, अभिभावकों को लिखित पत्र द्वारा ही सूचना भेज सकेगा। उन्होंने बताया कि इस मामले में यदि किसी भी स्कूल की कोई शिकायत मिलती है तो उक्त स्कूल की मान्यता समाप्त करने की एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।

कॉपी-किताब-स्कूल ड्रेस भी नहीं बेच सकते

निजी स्कूल प्रबंधन की मनमानी और कमीशनबाजी पर रोक लगाने के लिए कुछ समय पहले भी एक आदेश जारी किए गए थे। जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि कोई भी स्कूल प्रबंधक स्कूल परिसर में बच्चों को कॉपी-किताबें, स्कूल ड्रेस, टाई, बेल्ट, मोजे आदि की बिक्री नहीं कर सकेगा। ऐसा करते पाए जाने पर उक्त स्कूल के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। हालांकि, शिक्षा विभाग द्वारा अब तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से निजी शिक्षण संस्थानों में यह काम धड़ल्ले से चल रहा है।

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