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ठेकेदार ने दो महिला श्रमिकों को काम से निकाला, विरोध में मजदूर संघ का धरना
राजस्थान परमाणु बिजलीघर कॉलोनी में दो महिला श्रमिकों को ठेकेदार द्वारा काम से निकालने के विरोध में महिलाओं और अणुशक्ति श्रमिक संघ भामसं के पदाधिकारियों ने कॉलोनी सिविल ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया और धरने पर बैठ गए।
भामसं के कार्यकारी अध्यक्ष जोतसिंह ने बताया कि महिला कर्मचारी ऊदीबाई का बीमार पति के इलाज में घर-जमीन सब गिरवी हो चुका है। रावतभाटा से विभिन्न संगठन पैसा जमा कर उसका इलाज करा रहे हैं। वहीं दीक्षित इंटरप्राइजेज के ठेकेदार ने ऊदीबाई, भगवतीबाई जैसी अन्य कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। उन्होंने बताया कि महिलाओं ने ठेकेदार से पूरा वेतन और वेतन पर्ची मांगने पर यह कार्रवाई की गई। पिछले 8 दिनों से दोनों महिलाओं की अनुपस्थिति लगाई जा रही है। इसके विरोध में भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में धरने पर बैठे। इस दौरान सिविल ऑफिस में हंगामा भी हुआ।
महिलाओं ने ठेकेदार के खिलाफ थाने में दर्ज कराई शिकायत
ऊदीबाई की ओर से दिए गए वेतन से राशि मांगने, ठेकेदार, सुपरवाइजर एवं अन्य के खिलाफ अभद्रता करने, जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने का आरोप लगाते हुए रावतभाटा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस के अनुसार मामले की जांच की जा रही है। दोनों पक्षों को देरशाम को बातचीत के लिए बुलाया गया था। समाचार लिखे जाने तक दोनों पक्ष थाने में मौजूद थे, बातचीत जारी थी।
15-20 साल से काम कर रहे श्रमिक
परमाणु बिजलीघर में ठेका श्रमिकों की स्थिति यह है कि कोई 15 साल से काम कर रहा है तो कोई 20 साल से। अधिकांश मजदूर वही रहते हंै, बस ठेकेदार बदल जाते हैं। ऐसे में दो महिलाओं को निकालने से श्रमिकों में रोष है।
रावतभाटा। महिला श्रमिकों को काम से निकालने पर विरोध करते भामसं पदाधिकारी व महिला श्रमिक।
ऊदीबाई
श्रमिकों का आरोप: पहले वेतन देते हैं, फिर वापस ले लेते हैं ठेकेदार
श्रमिकों का कहना है कि परमाणु बिजलीघर में अधिकांश ठेकेदार श्रमिकों को पूरा वेतन तो देते हैं, लेकिन बाद में राशि वापस ले लेते है। नहीं देने वाले श्रमिक को नौकरी से निकाल दिया जाता है। श्रमिक संघ का आरोप है कि इस मामले में परमाणु बिजलीघर प्रबंधक कोई कार्यवाही नहीं करता। परमाणु बिजलीघर के अधिकारी कहते हैं कि यह ठेकेदार की जिम्मेदारी है कि किसे रखे, किसे नहीं। उनके रिकार्ड में पूरा वेतन बैंकखाते में जमा हो रहा है, अब यदि कोई श्रमिक राशि वापस देता है तो यह उसकी जिम्मेदारी है। जबकि जिम्मेदारी विभाग की भी बनती है।