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धारा 20; मुख्यमंत्री ने कलेक्टर से कहा-अदालत के आदेश की पालना हो ताकि लोगों को राहत मिले
रावतभाटा उपखंड के वन्यजीव क्षेत्र में लगाई गई धारा 20 पर उच्च न्यायालय जोधपुर द्वारा दिए गए स्थगन आदेश की पालना करने के लिए चित्तौड़गढ़ जिला कलेक्टर इंद्रजीतसिंह को मुख्यमंत्री वसुंधराराजे ने निर्देश दिए हैं।
बुधवार को मुख्यमंत्री की ओर से चित्तौड़गढ़ में जनसंवाद आयोजित किया गया था। सांसद सीपी जोशी, विधायक सुरेश धाकड़ के नेतृत्व में भैंसरोड़गढ़ के रामस्वरूप गौड़, भगवानसिंह गौड़, ओम टेलर, पृथ्वीराज सोनी सीएम से मिले थे।
मुख्यमंत्री को बताया कि उच्च न्यायालय जोधपुर ने रावतभाटा उपखंड के वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में जो धारा 20 लागू की थी, उसे उच्च न्यायालय ने उचित नहीं माना है। याचिका के निर्णय होने तक रोक लगाई है। मुख्यमंत्री को उच्च न्यायालय के आदेश की प्रतिलिपि और ज्ञापन दिया गया। इस पर उन्होंने चित्तौड़गढ़ कलेक्टर को इस मामले में जल्द ही उचित कार्यवाही करने के लिए कहा। इस मौके पर यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी, विधायक सुरेश धाकड़, चंद्रभानसिंह आंक्या मौजूद थे। मुख्यमंत्री को बताया गया कि उच्च न्यायालय के आदेश को लागू करने से लगभग 40 हजार लोगों को लाभ मिलेगा। 62 हजार बीघा जमीन के मालिक लाभान्वित होंगे।
7 साल बाद कोर्ट के आदेश से बंधी उम्मीद
वन्यजीव अभयारण्य भैंसरोड़गढ़ ।
7 साल बाद 52 गांवों के लोगों को हाईकोर्ट ने राहत दी। 7 साल पहले वन्यजीव अभयारण्य के नाम पर 52 गांवों की जमीन की खरीद, विक्रय, ऋण, गिफ्ट, बक्शीश आदि पर धारा 20 के अंतर्गत रावतभाटा उपखंड के वन्यजीव क्षेत्र में लगाई गई रोक को हाईकोर्ट ने उचित नहीं माना था। भैंसरोडगढ़ निवासी रामस्वरूप गौड़ एवं अन्य की जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विजय विश्नोई ने एक आदेश में राजस्थान सरकार के सचिव वनविभाग सरकार जयपुर के आदेश 7 जुलाई 2011 एवं प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट एवं चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जयपुर के आदेश 18 जुलाई 2011 तक रिट के निर्णय तक रोक लगा दी। जिसमें 2011 के आदेश में वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम 1972 के अंतर्गत वन्यजीव अभयारण्य में स्थित सभी निजी स्वामित्व की भूमियों की खरीद, विक्रय, बक्शीश, सेलडीड एवं गिफ्ट आदि के पंजीयन पर रोक लगा दी गई थी। अब इस आदेश के बाद इस पर 25 अक्टूबर 2017 को स्टे दे दिया था।
न्यायालय में यह दी थी दलील
अधिवक्ताओं की और से न्यायालय को बताया कि राज्य सरकार की और वन्यजीव संरक्षण की धारा 18 के तहत तहसील रावतभाटा अंतर्गत वन्यजीव अभयारण्य कोटा द्वारा जारी नोटिफिकेशन बाबत आमंत्रित की गई थी। जिस पर सुनवाई पर जिला कलेक्टर चित्तौडगढ़ ने 21 अगस्त 1998 को जारी आदेश अनुसार वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में स्थित भूमियों को सरकार द्वारा अधिग्रहण करने की कोई योजना नहीं बताते हुए मात्र सीमाओं का निर्धारण करना उद्देश्य बताया जाकर यह स्पष्ट किया था कि इस क्षेत्र में निवास करने वाले सभी निवासियों को भूमि, मकान, संपत्तियों बाबत यह सभी अधिकार यथावत रहेंगे। जारी घोषणा का उद्देश्य मात्र अधिकारों का निर्धारण है। जो अधिकार नोटिफिकेशन जारी होने से पूर्व उन्हें प्राप्त है, वह अधिकार बने रहेंगे, लेकिन साल 2011 में उपरोक्त आदेश जो भूमि अवाप्ति के बाद विधिवत सभी कार्यवाही उपरांत घोषित अभयारण्य हेतु लागू होने चाहिए थे। वह तहसील रावतभाटा के वन्यजीव अभयारण्य के लिए जारी कर दिए गए। जबकि धारा 18 के बाद की कोई कार्यवाही लंबे समय तक नहीं की गई। इसलिए न्यायालय से राहत मांगी गई। जिस पर न्यायाधीश विजय विश्नोई ने याचिका का निर्णय होने तक रोक लगा दी थी।
अब आगे क्या
मुख्यमंत्री के निर्देश मिलने पर जिला कलेक्टर उच्च न्यायालय के आदेश की पालना में कार्यवाही करते है तो, लोगों के हक और अधिकार यथावत रहेंगे। बैंकों से किसान ऋण ले सकेंगे। इससे करीब 40 हजार निवासियों को राहत मिलेगी। अब इससे उन्हें पानी, बिजली जैसी जरूरी मंजूरियां मिलने में सुविधा रहेगी। लोग अपनी जमीन रहन या बेचान भी कर सकेंगे। इससे लगभग 62 हजार बीघा जमीन के मालिक, किसान लाभांवित हो सकेंगे।
रावतभाटा शहर को भी मिलेगी राहत
रावतभाटा के शिव कॉलोनी एवं वार्ड नंबर 1 को वनक्षेत्र में बताया जा रहा है। उसे भी राहत मिलेगी। वन विभाग ने इस क्षेत्र को भी अपना बताकर इस पर भी पाबंदी लगा रखी है।