रमजान के पहले जुमे पर रावतभाटा की जामा, मदीना मस्जिद में मुस्लिम समाज के लोग उमड़ पड़े। जामा मस्जिद में शहर काजी जुल्फीकार अहमद रिजवी ने बताया कि रमजान महीने में हर नेकी का सवाब (पुण्य) बाकी दिनों के मुकाबले सत्तर प्रतिशत अधिक होता है। अल्लाह इस पवित्र महीने में छोटी से छोटी नेकी के लिए भी बंदे को बेहिसाब सवाब अता करता है। इस महीने में रोजा रखकर पाबंदी के साथ नमाज की अदायगी करना स्वयं को सच्चाई और भलाई के रास्ते की ओर मोड़ना है। इस तरह से अल्लाह की रजा हासिल करना भी है।
पवित्र रमजान महीने में कुरान-ए-पाक की तिलावत, सुबह व शाम खुदा का जिक्र, दरूद व सलाम अल्लाह के करीब लाते हैं। इससे मन में अल्लाह का डर पैदा होता है। यह डर जिस इंसान में आ जाए वह हमेशा बुराई से बचा रहेगा। पूरा जीवन सच्चाई के मार्ग पर चलकर बिताएगा। रमजान के पवित्र महीने का यही असली उद्देश्य है। यही वह महीना होता है जिसमे बंदे अपना जीवन सत्यमार्ग पर चलने वाला बना सकते हैं। रमजान के पवित्र महीने के रूप में अल्लाह ने इंसानों को बुराई से बचकर सच्चाई पर चलने की संजीवनी दी है। इस मौके पर सदर बाबूखां ने सभी को माहे रमजान की मुबारकबाद दी। जामा मस्जिद में छत एवं बाहर बरामदे में भी नमाज अदा करने के लिए टेंट लगाए गए थे।
रावतभाटा. रमजान के पहले जुमे पर शुक्रवार को नमाज अदा करने पहुंचे मुस्लिम समाज के लोग।
सुकेत. रोजेदारों ने अदा की नमाज अमन चैन की दुअा मांगी।
मोड़क स्टेशन. मस्जिद में तकरीर करते हुए मौलाना।
मोड़क स्टेशन में अदा की नमाज
मोड़क स्टेशन. रमजान के पहले शुक्रवार को जुमे की नमाज रोजेदारों ने अदा की। नमाज के निर्धारित वक्त से पहले ही बड़ी संख्या में नमाजी मस्जिदों में पहुंच चुके थे, जिससे मस्जिद पूरी तरह से भर चुकी थी। काफी बड़ी संख्या में नमाजी मस्जिद के ऊपर नीचे की और अपने स्थान को तलाश कर नमाज अदा की। रमजान के पहले जुमे में नमाजियों की तादाद ज़्यादा होने से मस्जिदों में भी नमाजियों के लिए अलग स्थान की व्यस्था की गई थी। जिसके लिए ऊपर छाया करके जानमाज बिछाई गई। मस्जिदों में नमाज से पहले तकरीर का दौर चला तकरीर में इमाम साहब ने रमजान के महीने के नेकी कमाने के लिये सबसे सरल और आसान समय बताया। इस माह में अल्लाह रोज़े रखने वालों और पाबंदी से नमाज अदा करने वालो को खूब नेकियों से नवाजता हैं। यह माह खूब रहमत वाला है। इस महीने में अपनी हिस्से की ज़कात भी निकालना चाहिए। वही, रोजे रखने से नेक राह के दरवाजे खुलते हैं। पहले रोजे पर बाजारों में भी काफी रौनक रही। मस्जिदों के नजदीक फलों और अन्य खाद्य सामग्री की छोटी दुकानें सजी दिखाई दी। वही, मुस्लिम बस्तियों में शाम के समय काफी उत्साह देखा गया। पहले रोज़े को लेकर बच्चों और बड़ो में काफी उत्साह दिखाई दिया। शाम के समय बच्चे नये परिधान पहन कर इफ्तारी लेकर मस्जिदों की ओर जाते दिखाई दिए।
सुकेत: गर्मी उत्साह कम नहीं कर पाई
सुकेत. कस्बे में पहले रमजान के पहले जुमे पर बस स्टैंड स्थित नूरानी जामा मस्जिद, छोटी जामा मस्जिद व मदरसों में मुस्लिमजनों ने बड़ी संख्या में नमाज अदा की। उन्होंने देश मे अमन-चैन की दुआ मांगी। रमजान के पहले रोजे पर रोजेदारों ने सुबह उठकर सहरी की व दिनभर रोजा रखा। कस्बे में 44 डिग्री तापमान की भीषण गर्मी के बावजूद रोजेदारों ने हौसला नहीं हारा। करीब 15 घंटे लंबा रोजा पूरा कर शाम को रोजा खोला व नमाज अदा की।