उच्च शिक्षित भी सफाईकर्मी बनने पहुंचे, 192 पदों पर 792 आवेदन
नगर पालिका में सफाई कर्मियों के 192 पदों के लिए 792 लोगों ने आवेदन पत्र जमा कराए हैं। इनमें बड़ी संख्या में उच्च शिक्षित अभ्यर्थी भी शामिल हैं।
सवर्ण जातियों के लोग भी सफाईकर्मी बनने को आवेदन कर रहे हैं। रावतभाटा नगरपालिका में एक इंजीनियर एवं बीएड धारियों ने भी आवेदन किया है। ग्रेजुएशन, पोस्टग्रेजुएशन वाले कई आवेदक हैं। स्वायत्त शासन विभाग द्वारा सफाईकर्मी भर्ती प्रक्रिया 20 अप्रैल को शुरू की गई थी। अब नगरपालिका प्रशासन फार्मों की जांच करेगा। सफाईकर्मी बनने के लिए महज साक्षर होना ही पर्याप्त है, पर इसके लिए बीए, बीएड, सीपीएड, एमए, एमसीए, बीई फायर ट्रेनिंग और आईटीआई कर चुके अभ्यर्थी भी दौड़ में शामिल हो गए। कुल जमा हुए करीब 792 आवेदनों में महिला आवेदकों की संख्या लगभग 241 है। रावतभाटा नगरपालिका क्षेत्र में एक परिवार की सास, बहू व ननद ने एक साथ आवेदन पत्र जमा कराए।
नगरपालिका की ओर से की जाने वाली सफाईकर्मी भर्ती का मामला, एक परिवार की सास, बहू व ननद ने भी किया आवेदन
जनरल अभ्यर्थी बोले, परिभाषा बदल गई है, जुड़ने से क्या संकोच
आवेदकों में परंपरागत रूप से सफाई कार्य से जुड़े वाल्मिकी समाज के तो बड़ी संख्या में लोग हैं ही, पहली बार जनरल, ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग के लोग भी इसमें शामिल हुए। भर्ती सभी के लिए खुली होने से बेरोजगारों ने बिना संकोच आवेदन किए हैं। लोगों का कहना था कि इसका मतलब यह नहीं है कि वह गंदगी ही उठाएगा। अब सफाईकर्मी की परिभाषा बदल गई है।
सामान्य वर्ग में महज 30 आवेदन
सफाईकर्मी भर्ती में सबसे कम आवेदन सामान्य वर्ग के आए हैं। जिसमें 30 आवेदक हैं। एससी में सबसे अधिक 507 पुरुष, 200 महिलाएं हैं। एसटी वर्ग में 18 पुरुष, 1 महिला, ओबीसी में 42 पुरुष, 2 महिलाएं हैं। 14 विधवा महिलाएं, 9 परित्यक्ता, 4 विकलांग कोटे में भी आवेदन किए गए हैं।
होंगे कई फार्म निरस्त, उठाए सवाल
अखिल भारतीय वाल्मिकी महासभा ने सफाईकर्मी भर्ती में आवेदकों के फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र की शिकायत की है। यह भी कहा गया है कि भर्ती में आए कई बाहर के लोगों ने फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र बनाकर पेश किए हैं। वहीं यह भी पता लगा है कि कई लोगों ने मार्कशीट में भी हेरफेर किया है। इसके अलावा कुछ के जाति प्रमाणपत्रों पर भी सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में जांच में कई फार्म निरस्त होने की तलवार लटक रही है।