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32 साल से बंद बांध के स्लूज गेट खोलने के लिए क्या हमें विश्वबैंक के पास जाना पड़ेगा:विधानसभा समिति सदस्य

3 वर्ष पहले
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राजस्थान के सबसे बड़े बांध राणा प्रताप सागर के 32 साल से बंद पड़े 4 स्लूज गेट को खोलने के लिए क्या हमें विश्वबैंक के पास जाना पड़ेगा। यह सवाल न मीडिया का है ना ही आम व्यक्ति का। यह सवाल अब उठाया है, प्रदेश के सबसे बड़े सदन विधानसभा सदस्यों ने।

राणा प्रताप सागर बांध और पनबिजलीघर के दौरे पर रावतभाटा पहुंचे विधानसभा उपक्रम समिति के उपाध्यक्ष एवं उदयपुरवाटी के विधायक शुभकरण चौधरी ने यह सवाल अधिकारियों से किया। जब समिति के सामने वरिष्ठ पार्षद कानाराम चारण ने बताया कि रावतभाटा राणा प्रताप सागर बांध के 32 साल से स्लूज गेट नहीं खुले हैं। इसमें रिसाव हो रहा है। जिस पर जलसंसाधन विभाग के एईएन वीएस तोमर ने जवाब देते हुए कहा कि इसका प्रस्ताव बनाया गया है और केंद्रीय जल आयोग की टीम रावतभाटा का दौरा कर चुकी है। इसमें लगभग 3 करोड़ का खर्च आएगा। जिसके लिए विश्वबैंक से बजट उपलब्ध होगा। तब विधायक ने कहा कि क्या 3 करोड़ के लिए हमें विश्वबैंक के द्वार पर जाना पड़ेगा। यह तो हमारी सरकार यूं ही कर देगी। बाद में विद्युत उत्पादन निगम के सीएमडी एनके कोठारी ने स्पष्ट किया कि न केवल राणा प्रताप सागर बांध के, जवाहरसागर, कोटा बैराज, नहर सहित सभी प्रस्ताव सरकार ने भेज रखे हैं। जिसमें लगभग 100 करोड़ रुपए का प्रस्ताव है। यह बड़ा बजट है, इसके लिए फंड देना ही पड़ेगा। विधायक ने कहा कि समस्या तो स्लूज गेट की है, तो फिर स्लूजगेट का अलग से प्रस्ताव क्यों नहीं। इस पर अधिकारी जवाब नहीं दे पाए।

समिति अध्यक्ष मोहनलाल गुप्ता ने भास्कर से बातचीत में बताया कि मामले का समिति अपनी रिपोर्ट में उल्लेख करेगी और अधिकारियों से जवाब भी मांगेगी। हालांकि समिति राणा प्रतापसागर बांध का अवलेाकन करने नहीं आई थी, लेकिन पनबिजलीघर इसी पर निर्भर है। इसलिए यह मुद्दा समिति के सामने आया। समिति में सभापति विधायक मोहनलाल गुप्ता, सदस्य गौतमकुमार दक, शुभकरण चौधरी, अजीतसिंह, अलकासिंह, डॉ. मंजू वाघमार, दलीचंद डांगी शामिल थे। इस दौरान नगरपालिका अध्यक्ष बंशीलाल प्रजापत, उपाध्यक्ष मंजूलता जंगम, भाजपा नगर अध्यक्ष राजकुमार वधवा, पार्षद दिनेश सेन, दिलीप मीणा, कानाराम चारण, सत्यनारायण बुनकर, मीनाताई, बालकिशन गुलाटी, माणकसेन, रामेश्वर चौधरी मौजूद थे।

रावतभाटा. राजस्थान विधानसभा की राजकीय उपक्रम समिति के सदस्यों को पनबिजलीघर की कार्यप्रणाली की जानकारी देते एईएन एसके शर्मा।

रावतभाटा. पालिका सभागार में संबोधित करते राजकीय उपक्रम समिति के सभापति।

पालिका कार्यालय में भी स्वागत, बाडौलिया मंदिर, आरएपीपी भी देखा: राजस्थान विधानसभा की उपक्रम समिति के सदस्यों के रावतभाटा पहुंचने पर नगरपालिका सभागार में स्वागत किया गया। इस समारोह में नगरपालिका अध्यक्ष बंशीलाल प्रजापत, पालिका उपाध्यक्ष मंजूलता जंगम, नगर भाजपा अध्यक्ष राजकुमार वधवा, महामंत्री आनंदप्रकाश शर्मा, पार्षद कानाराम चारण, सत्यनारायण बुनकर, दिलीप मीणा, दिनेश सेन, मीना वानखेडे, रामेश्वर चौधरी, माणक सेन, हरीश वधवा, बाला गुलाटी आदि मौजूद थे। जयपुर से विधायक मोहनलाल गुप्ता, उदयपुरवाटी से विधायक शुभकरण चौधरी ने संबोधित करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार के विकास कार्य के परिणाम कर्नाटक में देखने को मिले हैं, कल राजस्थान में भी मिलेंगे। राजस्थान सरकार की योजनाओं के बारे में भी विस्तार से चर्चा की। समिति के सदस्यों ने प्राचीन बाडौलिया मंदिर एवं राजस्थान परमाणु बिजलीघर का भी अवलोकन किया। इसके बाद झालावाड़ रवाना हुए।

क्या है स्लूज गेट का मसला

रावतभाटा राणा प्रताप सागर बांध के कुल 21 गेट हैं। जिसमें 4 छोटे स्लूज गेट हैं। जो बांध की सतह पर स्थित है। लगभग 32 सालों से ये गेट नहीं खुले हैं। इसमें गाद और सील्ड जमा है। साल में 6 माह इस गेट के कारण लोगों को बदबूदार पानी पीना पड़ता है। लोगों को इससे परेशानी होती है। यह मामला बेगूं विधायक सुरेशधाकड़ ने विधानसभा में भी उठाया है। बांध के स्लूज गेट में भी रिसाव हो रहा है और इसकी चद्दर तक गल गई है। जलसंसाधन विभाग ने भी अपनी रिपोर्ट में इसे बांध के लिए खतरनाक बताया है।

विधायकों ने पूछा सालभर क्यों नहीं चलता पन बिजलीघर

रावतभाटा. महारणा प्रताप स्टेच्यू का अवलोकन करने पहुंचे समिति के सदस्य।

रावतभाटा| राजस्थान विधानसभा की उपक्रम समिति के सदस्यों ने बुधवार को राणा प्रताप सागर बांध स्थित पनबिजलीघर का अवलोकन किया। समिति में सभापति विधायक मोहनलाल गुप्ता, सदस्य गौतमकुमार दक, शुभकरण चौधरी, अजीतसिंह, अलकासिंह, डॉ.मंजू वाघमार, दलीचंद डांगी शामिल थे।

समिति के सदस्यों ने सभापति मोहनलाल गुप्ता के नेतृत्व में राणा प्रताप सागर बांध पनबिजलीघर की व्यवस्थाएं देखी। उन्होंने तकनीक को समझा। उन्होंने पूछा कि पनबिजलीघर से सालभर बिजली उत्पादन क्यों नहीं हो पाता। इस पर अधिकारियों ने बताया कि यह पनबिजलीघर गांधीसागर के पानी पर निर्भर है। वहां से जितना पानी मिलता है। उतने पानी से राणा प्रताप सागर बांध के पनबिजलीघर से बिजली बनाई जाती है।

जब खेती के लिए पानी की जरूरत होती है। तभी बिजली बनाई जाती है। अध्यक्ष मोहनलाल गुप्ता ने बताया कि समिति के सामने यह बात आई कि यहां पर स्टाफ की कमी है। जिसे समिति रिपोर्ट में पेश करेगी। यह भी बताया कि पनबिजलीघर से सबसे सस्ती बिजली बन रही है। समिति सदस्यों ने नियंत्रण कक्ष, टरबाइन आदि क्षेत्रों का अवलोकन किया। उनके साथ उत्पादन निगम के सीएमडी एनके कोठारी, अधीक्षण अभियंता जीके त्रिवेदी, कोटा थर्मल अधीक्षण अभियंता हरीबाबू, मुख्य अभियंता अजयकुमार सक्सेना, एक्सईएन आर के मुक्तावत, डीएसपी राजाराम मीणा, एसडीएम कैलाशचंद शर्मा, सीआई विरेंद्रसिंह, एईएन आशीष जैन एवं विधानसभा सचिवालय अनुभाग अधिकारी अशोककुमार, लोकेश कानखेड़िया, लोकेश जैन, संदीप उदयवाल, मनीष शर्मा मौजूद थे। समिति के सदस्य विधायक सुरेंद्र पारीक नहीं आए।

उत्तरीग्रिड के लिए जीवनदाता

एईएन एसके शर्मा, आशीष जैन ने समिति के सदस्यों को बताया कि राणा प्रताप सागर बांध पनबिजलीघर उत्तरीग्रिड के लिए जीवनदाता है। जब कभी उत्तरीग्रिड फेल हो जाता है, तो यहीं से चार्ज किया जाता है। यह पनबिजलीघर देश का शुरूआती पनबिजलीघर है। समिति के सदस्यों ने पनबिजलीघर की व्यवस्थाओं की सराहना भी की।

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