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जैन समाज का जिनागम संस्कार शिक्षण शिविर शुरू

3 वर्ष पहले
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रावतभाटा। जीवन जीने की कला संस्कारों से आती है। ज्ञान सुख का कारण बनता है। यह बात पुराना बाजार स्थित दिगंबर जैन मंदिर पाठशाला में 10 दिवसीय जिनागम संस्कार शिक्षण शिविर के शुभारंभ पर पंडित राकेश शास्त्री ने कही। उन्होंने कहा बच्चों को जैनत्व संस्कार शुरू से मिले। जीवन का लक्ष्य संस्कारवान बनना हो। जीवन का लक्ष्य धन अर्जन करना नहीं हो।

जैनत्व की पहचान नहीं भूले। जीवन के पतन का कारण नहीं बने। शिक्षण शिविर ज्ञान यज्ञ है। जैनत्व धर्म में जीवन का लक्ष्य पूजन,अभिषेक हो। जीवन में स्थायित्व लाए। सफलता कदम चूमेगी। पाश्चात्य संस्कृति से विपरीत प्रभाव पढ़ रहा है। लौकिक शिक्षा से संस्कार नहीं आते, इसके लिए धर्म का बीजारोपण करना होगा। जिनागम संस्कार शिक्षण शिविर का शुभारंभ बुधवार को जिनाभिषेक पूजन के बाद कुंडलपुर के बडेबाबा एवं 108 विद्यासागर महाराज का चित्र अनावरण, दीप प्रजजवलित, कलश स्थापना कर लेखचंद हरसोरा, बाबूलाल दुगेरिया, सुनील हरसोरा, राजेशहरसोरा ने किया गया। पंडित राकेश शास्त्री ने संस्कार एवं ज्ञान अर्जन की जानकारी दी। शिविर में भाग लेने वालों को प्रोत्साहित किया गया। शिविर सुबह 8.30 से 9.30 बजे तक की प्रवेशिका भाग प्रथम की कक्षा संचालित की गई। दाेपहर 2.30 से 3.30 बजे इष्टोपदेशजी की कक्षा संचालित की गई। अध्यात्म के गूढ विषय को सरल और सटीक भाषा में समझाया गया। संचालन हरकचंद जैन ने किया। इस मौके पर बाबूलाल सेठिया सहित समाज के लोग मौजूद थे।

शिक्षण शिविर

रावतभाटा के पुराना बाजार स्थित दिगंबर जैन मंदिर पाठशाला में 10 दिवसीय जिनागम संस्कार शिक्षण शिविर

रावतभाटा. रावतभाटा में जैन समाज की ओर से जिनागम संस्कार शिक्षण शिविर में संबोधित करते राकेश शास्त्री ।

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