रावतभाटा उपखंड के दूरस्थ क्षेत्र जावदा स्थित आदर्श पीएचसी की लचर व्यवस्था व एक प्रसूता की मौत के बाद चिकित्सा विभाग हरकत में आया है। कलेक्टर के निर्देश पर सीएमएचओ ने सोशल मॉनिटरिंग कमेटी से जांच कराने के साथ वहां 24 घंटे कर्मचारी की ड्यूटी का भी आदेश दिया।
देवपुरा निवासी प्रसूता समुंदरदेवी प|ी हेमराज भील की प्रसव के बाद अधिक ब्लीडिंग से शुक्रवार सुबह मौत हो गई थी। महिला को गुरुवार देर रात प्रसव के लिए परिजन जावदा पीएचसी लाए थे। वहां कोई कर्मचारी नहीं मिला। परिजनों का कहना है कि गांव में डॉक्टर के घर पर भी पहुंचे, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी वे नहीं जगे। इसके बाद एक निजी क्लिनिक पर प्रसव करवाया गया। अधिक खून बहने से समुंदर देवी की मौत हो गई। दैनिक भास्कर में पूरा मामला सामने आने के बाद चिकित्सा विभाग हरकत में आया। कलेक्टर इंद्रजीतसिंह ने कमेटी गठित कर जांच व कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएमएचओ डाॅ. इंद्रजीतसिंह ने पीएचसी के डाॅ. सुधेश राघव को पीएचसी पर 24 घंटे एक कर्मचारी की ड्यूटी लगाने के लिए पाबंद किया। शुक्रवार रात घटना की जानकारी मिलने पर कलेक्टर ने कहा था कि आदर्श पीएचसी पर 24 घंटे कोई एक कर्मचारी तो होना ही चाहिए। प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टर या स्टाफ को बुलाना सरकारी जिम्मेदारी है।
बीसीएमओ ने पहुंचकर ली जानकारी
रावतभाटा के बीसीएमओ डाॅ. जीजे परमार के अनुसार पता चलने पर मैं शुक्रवार शाम को ही देवपुरा गया। प्रसूता के घर जाकर भी मामले की जानकारी ली। प्रसूता की मौत के मामले में सोशल मॉनिटरिंग टीम से जांच कराई जाएगी। ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।
आदर्श पीएचसी होने की खुली पोल : देवपुरा की प्रसूता की मौत ने चिकित्सा विभाग की व्यवस्था और निर्देशों की पोल खोल दी। आदर्श पीएचसी पर 24 घंटे कर्मचारी होना चाहिए, लेकिन यहां ऐसा नहीं था। इस पीएचसी में एक डॉक्टर, दो जीएनएम व एक महिला कर्मचारी का पद रिक्त है। इस कारण 24 घंटे ड्यूटी नहीं रहती।
ग्रामीणों में रोष, कार्रवाई की मांग
प्रसूता समुंदर भील की मौत से ग्रामीणों में रोष है। उदयराज, शांतिलाल, प्रकाश, फूलचरण, रामलाल धाकड़, कालू, बालू, देवा भील आदि ने बताया कि अस्पताल में किसी कर्मचारी के नहीं मिलने व डॉक्टर के नहीं जागने से यह घटना हुई। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
कमेटी में आरसीएचओ, बीसीएमओ को शामिल किया
देवपुरा गांव में प्रसूता की मौत से हरकत में आए चिकित्सा विभाग ने अब मामले की जांच कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। इसमें आरसीएचओ, बीसीएमओ चित्तौड़ एवं बीसीएमओ रावतभाटा को शामिल किया है। यह कमेटी सात दिन में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करेगी। यह कमेटी मौके पर जाकर सोशल ऑडिट के माध्यम से तथ्यात्मक जांच करेगी। इसके बाद कमेटी की ओर से सात दिन के भीतर यह रिपोर्ट विभाग के उच्चाधिकारियों को दी जाएगी। यदि रिपोर्ट में डॉक्टर सहित अस्पताल के स्टाफ की गलती सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।