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बच्चों को पोषाहार नहीं, प्रेमपुरा स्कूल 38 दिन से बंद, बच्चों को पढ़ाने के लिए कहा तो शिक्षक ने ग्रामीणों पर करवा दिया केस

3 वर्ष पहले
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सरकारी स्कूलों में शिक्षक मौज कर रहे हैं, वे न तो बच्चों को पढ़ा पा रहे हैं और न ही समय पर स्कूल आते-जाते हैं। लापरवाही का आलम ऐसा है कि कुछ जगहों पर स्टूडेंट्स को सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से नहीं मिल पा रहा है। कुछ जगहों पर पोषाहार का स्वाद ऐसा है कि बच्चे उसे खाने से इनकार कर देते हैं। हालांकि, एक-दो जगह पोषाहार की क्वालिटी बेहतर है।

सरकारी स्कूलों के निरीक्षण के दौरान इस तरह की लापरवाही सामने आई। जब जिम्मेदार अधिकारियों ने स्कूलों में कामकाज देखा तो वे चौंक गए। इतना ही नहीं ऐसी खामियां मिलीं कि शिक्षा की गुणवत्ता पर ही सवाल खड़े हो गए। प्रेमपुरा के स्कूल को शिक्षकों ने क्षतिग्रस्त बता दिया, जब अधिकारी यहां पहुंचे तो स्कूल को सही पाया। इतना ही नहीं जब दो अधिकारियों ने एक शिक्षक से बात की तो उसने दोनों से ही झूठ बोला। अधिकारियों ने भी माना कि शिक्षक घोर लापरवाही कर रहे हैं। वहीं, कुछ जगहों पर शिक्षक अच्छा काम कर रहे हैं।

गुणवत्ता: पोषाहार चखकर देखा

रावतभाटा. बाड़ौलिया स्कूल में पोषाहार की गुणवत्ता की जांच की गई।

स्कूल और आंगनबाड़ी बंद मिलने के मामले में विभाग सख्त कार्रवाई करेगा। जिसने लापरवाही की है, उसे नोटिस देकर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उच्चाधिकारियों को पूरी रिपोर्ट भेजी जा रही है। -देवकीनंदन गौड़, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, भैंसरोडगढ़

प्रेमपुरा के सही स्कूल को क्षतिग्रस्त बताया: दरीबा, प्रेमपुरा स्कूल के अवलोकन के दौरान गंभीर खामियां मिलीं। लापरवाही का आलम यह है कि प्राथमिक स्कूल प्रेमपुरा बीते 1 जुलाई से बंद है। यहां के शिक्षक राजेंद्र मीणा भवन को क्षतिग्रस्त बताकर प्राथमिक स्कूल दरीबा में स्कूल का संचालन कर रहे हैं। जबकि, स्कूल में दो कमरे ठीक हैं, साथ ही पड़ोस में आंगनबाड़ी भी संचालित है। जिसमें गांधीसागर की रहने वाली यमुना परिहार कार्यकर्ता है। अप्रैल 2018 से ही आंगनबाड़ी भी बंद है। सहायिका नर्बदा बाई रेबारी मात्र पोषाहार वितरण करने के लिए आती है।

अधिकारियों से झूठ बाेलते हैं शिक्षक: ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि प्रेमपुरा, दरीबा में भवन पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त नहीं है। भवन के कमरों में कक्षाएं संचालित की जा सकती हैं। यहां पर एमडीएम कार्यक्रम पूर्णरूप से बंद है। न स्कूल संचालित है, न बालकों को पोषाहार दिया जाता है। शिक्षक राजेंद्र मीणा से फोन पर बात करने पर बताया कि वह स्कूल से निकल चुके हैं। कोटड़ा बालाजी तक पहुंच चुके हैं। दुबारा उसे स्कूल में बीईईओ ने बुलाया, तो उसने कहा कि मैं चित्तौड़गढ़ गया था, बस्सी में हूं। जिससे पता लगा कि शिक्षक एक अधिकारी से भी झूठ बोल रहा है।

ज्यादातर जगह हालात खराब मिले

रावतभाटा। प्रेमपुरा में निरीक्षण करते बीईईओ देवकीनंदन गौड़ व अन्य।

भैंसरोडगढ़। भैंसरोडगढ़ स्कूल में पोषहार का निरीक्षण किया गया।

निमोदा मिडिल स्कूल में आधे ही बच्चे मिले

बीईईओ देवकीनंदन गौड़ ने मंगलवार को निमोदा मिडिल स्कूल का निरीक्षण किया। जिसमें 61 बच्चों का नामांकन था। 44 बच्चे मौजूद मिले। यहां पर व्यवस्थाएं सही मिली। नाहरगढ़ में सर्व शिक्षा अभियान आरपी ओमप्रकाश रेगर ने निरीक्षण किया। यहां 70 में से 32 बच्चे ही मौजूद थे। संस्था प्रधान अवकाश पर थे। पोषाहार सामग्री का स्टॉक रजिस्टर पूर्ण नहीं था। भुंजरखुर्द में सर्व शिक्षा अभियान आरपी जगदीश मेवाड़ा ने निरीक्षण किया। यहां पर 134 बच्चों का नामांकन था। संस्थाप्रधान अवकाश पर थे।

ग्रामीण बोले- शिक्षक करते हैं दादागिरी: स्थानीय अभिभावकों ने अधिकारियों को बताया कि जब हमने शिक्षक को स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए कहा तो वह दादागिरी करने लगा। शिक्षक ने श्यामलाल भील पर मुकदमा दर्ज तक करवा दिया। ग्रामीणों को धमकी दी। ग्रामीणों ने स्कूल में शिक्षण व्यवस्था के लिए व्यवस्था कराने की मांग की है। जिससे छोटे स्टूडेंट्स पढ़ाई कर सकें। दरीबा प्राथमिक स्कूल प्रेमपुरा से 3 किलोमीटर दूर है। जंगल का रास्ता है। जहां पर बच्चों को पढ़ने जाना पड़ता है, दूरी होने के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पाते।

भैंसरोडगढ़ के स्कूल में रसोईघर नहीं: उच्च माध्यमिक स्कूल भैंसरोडगढ़ के पोषाहार का निरीक्षण बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल की प्रिंसिपल सलमा सय्यद ने किया। उन्होंने बताया कि पोषाहार में 203 स्टूडेंट्स में से 159 स्टूडेंट्स मौजूद थे। भोजन की गुणवत्ता अच्छी पाई गई। भोजन बनाने का स्थान स्वच्छ था, बर्तन भी स्वच्छ थे। खाद्यान्न का रखरखाव ठीक था। लेकिन स्कूल में रसोईघर नहीं है। शेष पेज-16 पर

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