नियम-134ए के तहत दाखिला पाने वाले गरीब परिवारों के लिए निजी स्कूलों में पढ़ना आसान बात नहीं है। क्योंकि निजी स्कूल संचालक गरीब परिवारों के बच्चों को सरकार की मामूली फीस की शर्तों पर किसी भी सूरत में पढ़ाने को तैयार नहीं हैं। यही कारण है कि दाखिले के एक महीने बाद भी इन बच्चों को एक बार भी होमवर्क नहीं दिया गया है और न ही इनकी कापी चेक की गई। इतना ही नहीं, ट्रांसपोर्ट किराया देने के बावजूद इन बच्चों को स्कूल वाहनों में बैठाने को तैयार नहीं हैं।
बच्चों के साथ स्कूल में हो रहे इस भेदभाव को लेकर अभिभावकों में भारी रोष है। नाराज अभिभावकों ने इस भेदभाव के विरोध में सोमवार को बच्चों के साथ जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर रोष जताया। इस दौरान बच्चों एवं अभिभावकों ने लघु सचिवालय में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन उपायुक्त को सौंप कर भेदभाव पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाने एवं स्कूल प्रिंसिपल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कराने की मांग की। उपायुक्त डाॅ. गरिमा मित्तल ने अभिभावकों व बच्चों की बात सुनने के बाद उनका ज्ञापन डीईओ को प्रेषित कर इस मामले में उचित कार्रवाई कर रिपोर्ट करने के निर्देश दिए।
अभिभावक सतीश, संतलाल, सुरेंद्र, संतलाल, राधेश्याम शर्मा, कृष्ण, विपिन, पवन रंगा, अशोक कुमार, बीरेंद्र, राज सिंह, र|लाल, महीपाल, प्रवीण, मनोज, कुलदीप, रामकिशोर, मैना, रेखा, विजय लक्ष्मी, सीमा देवी, शर्मिला, अंजली, सुनीता, रेखा, सुमन, दीपा, सरोज, राजेश, दुर्गा, अंजू, माया व अनिता आदि ने उपायुक्त को सौंपे अपने ज्ञापन में बताया कि उनके बच्चों ने नियम-134ए के तहत लिखित परीक्षा उत्तीर्ण कर कड़ी मशक्कत के बाद शहर के रेवाड़ी रोड पर स्थित एक निजी स्कूल में दाखिला लिया है, लेकिन दाखिला लेने के एक महीने बाद भी स्कूल प्राचार्य के इशारे पर शिक्षक उनके बच्चों को कक्षा में अलग से बैठाते हैं। इन बच्चों को कोई होमवर्क नहीं दिया जाता है और न ही कभी इनकी कापी चैक की जाती है। इतना ही नहीं, बस का किराया देने के बावजूद भी उनके बच्चों को अपने वाहन में नहीं बैठा रहे हैं।
नारनौल. निजी स्कूलों में दाखिला लेने वाले बच्चों के साथ हो रहे भेदभाव के विरोध में डीसी डॉ. गरिमा मित्तल को ज्ञापन देते हुए।
हमारेे बच्चों में पैदा हो रही है हीन भावना
अभिभावकों ने बताया कि स्कूल में उनके बच्चों के साथ पिछले एक महीने से किए जा रहे इस भेदभाव के चलते उनमें हीन भावना पैदा होने लगी है। स्कूल से घर आते ही बच्चे उन्हें उनके साथ हो रहे भेदभाव बारे बताते हैं तथा स्कूल न जाने की जिद भी करने लगे हैं। जो गहन चिंता का विषय है। बच्चे कहते हैं कि बच्चों के सामने उनसे गलत बोला जा रहा है।
स्कूल के खिलाफ नहीं हो रही है कोई कार्रवाई
अभिभावकों ने बताया कि वे पिछले एक माह से निजी स्कूल संचालक की मनमानी एवं भेदभाव के विरोध में वे खंड शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, एसडीएम से कई बार मिल कर अपनी शिकायत दर्ज करवा चुके हैं, लेकिन अभी तक शिक्षा विभाग की ओर से इन स्कूल संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई कार्रवाई नहीं की गई है।
निजी स्कूल बार-बार पैसे की कर रहे हैं मांग
अभिभावकों ने बताया कि भेदभाव करने संबंधी शिकायत लेकर जाते हैं तो स्कूल संचालक उनसे कहते हैं कि अगर यहां बच्चे को पढ़ाना है तो पूरी फीस जमा करवाओ। अन्यथा अपने बच्चे का सरकारी स्कूल में दाखिला करवा दो। इतना ही नहीं, जब परेशान अभिभाव इन पैसों की उनके रसीद देने की बाद कहते हैं तो रसीद देने के मना कर देते हैं।
शिकायत मिली तो कार्रवाई करेंगे 134ए के तहत प्रवेश लेने वाले बच्चों को हर हाल में उनके चुने हुए विद्यालयों में शिक्षा मिलेगी। बच्चों को अलग पढ़ाया जा रहा है या फिर उनको होमवर्क नहीं दिया जा रहा है, इस संदर्भ में मेरे पास अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है। यदि किसी स्कूल के प्रति अभिभावक व बच्चों की शिकायत आई तो उस के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - प्रो. रामबिलास शर्मा, शिक्षा मंत्री हरियाणा सरकार।