- Hindi News
- National
- सोनोग्राफी के लिए वेटिंग लिस्ट 1200 पार आज नंबर लगाया तो 2 माह बाद होगी जांच
सोनोग्राफी के लिए वेटिंग लिस्ट 1200 पार आज नंबर लगाया तो 2 माह बाद होगी जांच
सोनोग्राफी जांच के लिए गत दिनों जयपुर में भी मीटिंग हुई थी, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर के लिए विज्ञप्ति जारी करने का निर्णय हुआ। राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेज को अभावग्रस्त क्षेत्र में मानते हुए डॉक्टर की सैलेरी बढ़ाई है। ऐसे में डॉक्टर आने की उम्मीद है। डॉ. राजन नंदा, अधीक्षक
एसआरजी अस्पताल में रोज सोनोग्राफी कराने 100 मरीज आते है, केवल 20 ही की होती है जांच
भास्कर न्यूज|झालावाड़
जिला एसआरजी अस्पताल में इन दिनों सोनोग्राफी के लिए आने वाले मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रतीक्षा सूची लंबी होने के कारण मरीजों को 13 जून की तारीख जांच के लिए दी जा रही है।
शुक्रवार को जिन मरीजों को डॉक्टर ने सोनोग्राफी जांच लिखी, उनको दो महीने बाद जांच कराने के लिए बुलाया जा रहा था। यहां तक कि स्टाफ के परिजनों की भी जांच नहीं हो पा रही। ऐसे में बाहर निजी सेंटर पर जांच कराने के लिए जाना पड़ रहा है। अब तो हालत यह हो गए हैं कि ओपीडी के बाद तो जिला एसआरजी व जनाना अस्पताल में जांच की सुविधा ही नहीं है। दोनों अस्पतालों में जांच करने के लिए केवल दो ही सोनोलॉजिस्ट हैं और वह ओपीडी में ही जांच करते हैं। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को तो निजी सेंटर पर ले जाना पड़ रहा है। झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग के हालात भी सुधरने के नाम नहीं ले रहे हैं। डेढ़ साल होने को आया, न तो मेडिकल कॉलेज को रेडियोलॉजिस्ट मिल पाया है और ना ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन सोनोग्राफी जांच सुविधा को पीपीपी मोड पर शुरू कर पाया है। कॉलेज प्रशासन द्वारा सोनोग्राफी जांच को पीपीपी मोड पर देने के प्रयास किए गए, लेकिन कोई फर्म आगे आने को तैयार नहीं हो रही है। जनाना अस्पताल में एक्सपर्ट डॉक्टर होने से वहां तो प्रतिदिन 50 से 60 गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी हो जाती है, लेकिन एसआरजी अस्पताल आने वाले मरीजों को तो केवल तारीख मिलती है। रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से मेडिकल कॉलेज में सोनोलोजिस्ट भी तैयार नहीं हो पा रहे हैं।
सोनोग्राफी कक्ष के बाहर मरीजों की भीड़
80 मरीज बिना जांच कराए लौटते हैं : एसआरजी अस्पताल में सोनोग्राफी जांच के लिए प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज आ रहे हैं, लेकिन, जांच केवल 20 मरीजों की हो पा रही है। ऐसे में 80 मरीज बिना जांच कराएं ही लौट रहे हैं। इलाज जरूरी होने के कारण मरीज बाहर निजी सेंटरों पर जांच कराने को मजबूर हैं।
हफ्ते में 5 दिन होती है सोनोग्राफी जांच : एसआरजी अस्पताल व जनाना अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। मेडिकल ऑफिसर को चार्ज दे रखा है। एक और महिला डॉक्टर है जो सोनोग्राफी जांच करती है। इन दोनों के साप्ताहिक अवकाश अलग-अलग दिन होने से दो दिन तो जांच कार्य बंद रहता है। कोई लंबी छुट्टी पर चला गया तो एक अस्पताल की जांच तो बंद रहती है।
अधीक्षक बोले-डॉक्टर आने की उम्मीद है
इमरजेंसी में भी 1 घंटे बाद जांच
रामगंजमंडी निवासी काशिफ खान ने बताया कि पेट में तेज दर्द होने पर झालावाड़ दिखाने आया था। यहां डॉक्टर ने सोनोग्राफी जांच लिखी है। सोनोग्राफी कक्ष में जांच कराने गए तो 13 जून की तारीख दी गई। अस्पताल में कार्यरत अपने परिचित को बुलाया, लेकिन जांच नहीं हुई, बाद में निजी सेंटर पर जाना पड़ा।
बकानी निवासी संगीता बाई ने बताया कि उनके कस्बे में सोनोग्राफी जांच की सुविधा नहीं है, ऐसे में झालावाड़ अस्पताल जांच कराने आई थी, लेकिन यहां भी जांच के लिए दो माह बाद की डेट दी है। 35 किमी दूर से जांच कराने आई, लेकिन वह भी नहीं हुई। इतना बड़ा अस्पताल होते हुए भी जांच नहीं हो रही।
झालावाड़ निवासी सलमा बानो ने बताया कि डॉक्टर को दिखाने पर पेट में गठान होने की आशंका जताई थी, इस पर सोनोग्राफी जांच लिखी है, लेकिन जांच कक्ष में गए तो जून की तारीख दे रहे हैं। अब इंतजार करने से तो अच्छा बाहर जांच कराएंगे।
भवानीमंडी हनोतिया निवासी रामराज ने बताया कि तीन दिन पहले भी आए थे, लेकिन जांच नहीं हो पाई थी। आज दर्द होने पर पुन: आया हूं। ज्यादा मरीज भी नहीं हैं, फिर भी 13 जून की तारीख दी है। इतना लंबा इंतजार कैसे करें। इतने समय में तो मरीज ही मर जाए।