आधार बिना सरकारी स्कूल भी नहीं दे रहे दाखिला, मौखिक आदेशों का हवाला देकर टरका रहे मुखिया
शहर के दो सरकारी स्कूलों ने 11 बच्चों को दाखिला देने से मना कर दिया है। दाखिला न देने का कारण इन सभी बच्चों के पास आधार कार्ड का न होना है। स्कूल मुखिया इन बच्चों को दाखिला देने से ऐसे मना नहीं कर सकते। लेकिन नियमों को ताक पर रख ये स्कूल मुखिया बच्चों को पिछले छह दिन से रोज चक्कर कटवा रहे हैं। फिलहाल शिक्षा विभाग स्कूलों में ड्रॉप आउट बच्चों को फिर से स्कूल से जोड़ने व सरकारी स्कूलों में अधिक बच्चों को दाखिला देने के लिए बड़े स्तर पर प्रवेश उत्सव जैसे कार्यक्रम कर रहा है। लेकिन स्कूल स्तर पर 11 बच्चों को दाखिला न देना अलग स्थिति बना रहा है। दरअसल सेक्टर दो में संचालित गांधी स्कूल के11 स्टूडेंट्स के पास आधार नंबर नहीं है। ये वो बच्चे हैं जिनके माता पिता यूपी व बिहार राज्यों से आकर यहां मेहनत मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं। गांधी स्कूल के सांयकालीन कक्षाओं में इन बच्चों ने अभी तक की पढ़ाई की है। इन बच्चों को जसबीर कॉलोनी और सेक्टर 2-3 के राजकीय मिडल स्कूल में दाखिला नहीं दिया गया। वहीं मामले में डीईओ ने ऐसा कोई मामला संज्ञान में न होने की बात कहते हुए इसकी जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि बच्चों को दाखिला जरूर मिलेगा।
हेडमास्टर का तर्क- एमआईएस पोर्टल में आधार के बगैर दाखिला दर्ज नहीं होगा
गांधी स्कूल के संचालक नरेश कुमार 6 से 11 साल की उम्र के आदित्य, पीयूष, मुकुल, सौरभ, दीपक, मंगला, ज्योति, अशोक, विशाल, नंदनी, चांदनी व रजनीश को लेकर सेक्टर पांच स्थित जसबीर कॉॅलोनी (जेल) में स्थित राजकीय माध्यमिक स्कूल व सेक्टर दो-तीन में स्थित राजकीय माध्यमिक स्कूल में दाखिला दिलाने गए। नरेश ने बताया कि छह दिन से वो दोनों स्कूलों के चक्कर लगा रहे हैं। स्कूल स्टाफ की ओर से बच्चों के पास आधार न होने का हवाला देकर दाखिला देने से मना किया जा रहा है। स्कूल के हेडमास्टर ने तर्क दिया है कि एमआईएस पोर्टल में बिना आधार अपडेट हुए बच्चों का दाखिला नहीं होता है। जब स्कूल प्रशासन से आपत्ति जताई गई तो उन्होंने आधार के बिना दाखिला न देने के मौखिक आदेश विभाग की ओर से जारी होने का हवाला दिया।
दाखिला न देना मौलिक अधिकारों से वंचित करना
सरकारी स्कूल आधार न होने पर 6 से 11 साल तक के बच्चों को दाखिले से इंकार कैसे कर सकता है ? राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत कोई भी स्कूल बच्चे को किसी भी डॉक्युमेंट की वजह से दाखिले से इनकार नहीं कर सकता है। दूसरी बात, सरकार को दाखिला जैसी चीजों में आधार को अनिवार्य करने के साथ ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था भी करनी चाहिए, जिससे इस तरह की दिक्कतें न हों। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी स्पष्ट है कि हर चीज के लिए आधार को अनिवार्य नहीं किया जा सकता है। शिक्षा तो मौलिक अधिकार है, इससे वंचित करना गलत है। -एडवोकेट डॉ. दीपक भारद्वाज, पूर्व सचिव, बार एसोसिएशन रोहतक
5वीं में दाखिला देने के लिए आधार के साथ हलफनामा भी मांगा : नरेश कुमार का आरोप है कि सरकारी स्कूल में 11 साल के सोनू को पांचवीं कक्षा में दाखिला देने के लिए हलफनामा भी देने को कहा गया। हलफनामे में यह लिखाना था कि सोनू ने घर में रहकर चौथी कक्षा के स्टैंडर्ड की पढ़ाई की हो। जबकि शिक्षा के मौलिक अधिकार में ऐसी शर्तों का जिक्र नहीं है। आयु के मुताबिक कक्षा में प्रवेश पाने के लिए ब्रिज कोर्स के लिए स्पेशल शिक्षक भी मौजूद नहीं है।
विभाग की गाइडलाइंस में दाखिले से वंचित करने का जिक्र नहीं : स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन हरियाणा के जिला संरक्षक व रिटायर्ड लेक्चरर जगबीर सिंह कलकल ने बताया कि स्कूल मुखिया आधार न होने का हवाला देकर दाखिला नहीं लेेते हैं। लिहाजा मजदूर वर्ग के बच्चों को भटकना पड़ता है। जबकि स्कूल शिक्षा विभाग की गाइडलाइंस में बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिले से वंचित करने का कहीं जिक्र नहीं है। लेकिन स्कूल मुखिया अपना सिरदर्द खत्म करने के लिए बच्चों को दाखिला नहीं देते हैं। जो कि मौलिक शिक्षा अधिकार छीनने की श्रेणी में आता है।
बच्चों का आधार बनाना जरूरी, दाखिला भी देंगे
आरटीई एक्ट के तहत स्कूल में दाखिला देना अनिवार्य है। स्कूल मुखिया आधार के बिना प्रवेश नहीं दे रहे, ये मामला संज्ञान में नहीं है। यदि कोई हेडमास्टर ऐसा कर रहा है तो मैं जांच कराकर कार्रवाई करूंगी। बच्चे के पास यदि आधार नहीं है तो भी उसे पहले दाखिला देना होगा फिर स्कूल मुखिया और अभिभावक दोनों को मिलकर बच्चे का आधार बनवाने की जिम्मेदारी निभानी होगी। ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ बच्चे को मिल सके। इन बच्चों को दाखिले से वंचित नहीं रहने देंगे। -परमेश्वरी हुड्डा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी