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कॉलेजियम सदस्यों के परिजनों को नौकरी से निकालने का आरोप, प्रधान ने सिरे से नकारा

3 वर्ष पहले
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वैश्य शिक्षण संस्था में नाराज कॉलेजियम सदस्यों की ओर से आम सभा की बैठक बुलाने के लिए खोले गए मोर्चे के बाद अब दबाव की राजनीति तेज हो गई है। नाराज कॉलेजियम सदस्यों का कहना है कि प्रधान के खिलाफ अविश्वास जताने वाले सदस्यों के परिजनों को संस्था से निकालने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसके तहत 11 अप्रैल को वैश्य कॉलेज आफ इंजीनियरिंग में सहायक प्रोफेसर तैनात राधिका गर्ग को नौकरी से तुरंत प्रभाव से निकालने का पत्र जारी कर दिया गया। नियमों के तहत तीन महीने के नोटिस पीरियड का वेतन का चेक 99,954 रुपए भी साथ में थमा दिया गया। नाराज कॉलेजियम सदस्यों का कहना है कि इसके तहत चार सदस्यों के विश्वास में साइन करवाए गए हैं। इसके बाद 13 अप्रैल को साइन होते ही सहायक प्रोफेसर को दोबारा से नियुक्त कर लिया गया। इस तरह से दबाव की राजनीति की जा रही है।

ब्लैकमेल की राजनीति कर रहे प्रधान : जैन

संस्था में चार कॉलेजियम सदस्य थे, उनके विश्वास के लिए साइन करवाने को लेकर उनकी रिश्तेदार एक शिक्षिका के घर चिट्ठी भेज दी गई कि आपको हटा दिया गया है और साथ में तीन महीने का 99954 रुपए का चेक भेज दिया गया। इसके बाद उससे सेटलमेंट कर उसे ज्वाइन करवा लिया गया। कुछ अन्य कर्मचारियों पर टर्मिनेशन लेटर का दबाव बनाकर उनसे जुडे कॉलेजियम सदस्यों के साइन करवाए जा रहे हैं। इन हस्ताक्षर से हालांकि कोई असर नहीं पड़ने वाला है व ये साइन करवाने में लगे हैं। - नवीन जैन, पूर्व प्रधान, गवर्निंग बॉडी।

सदस्यों पर दबाव बनाना गलत

वैश्य संस्था में सदस्यों पर उनके परिजनों को नौकरी से निकालने का दबाव बनाया जा रहा है। यह ठीक नहीं है। जबरन लोगों के साइन करवा रहे हैं, ताकि वे प्रधान के पक्ष में ही रहे। इंजीनियरिंग कॉलेज से शिक्षक राधिका को चार कॉलेजियम सदस्यों पर दबाव बनाकर अपने पक्ष में साइन करवा दिए गए। हस्ताक्षर होने के बाद उसे लगा दिया गया। यह ब्लैकमेलिंग की जा रही है। - आनंद जैन, कॉलेजियम सदस्य, रोहतक।

चरित्रहीन व चोर संस्था के पीछे लगे

वैश्य संस्था में चरित्रहीन और चोर आदमी पीछे लग गए हैं। मैं संस्था में ना तो चरित्रहीनता करने दूंगा और ना ही चोरी। इनकी दुकानदारी बंद हो गई है, इसलिए ये विरोध कर रहे हैं। भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा। महासचिव का पत्र भी मेरी सहमति से ही लिया गया है। राधिका अभी भी पहले की तरह की काम कर रही है। किसी को नहीं हटाया गया है। ये मामला हमारी संस्था का इंटरनल मैटर है। आज के समय में कोई किसी का दबाव नहीं मानता। - विकास गोयल, प्रधान, वैश्य संस्था।

महासचिव ने ये लिखा पत्र

नौकरी से हटाए जाने के प्रधान के फैसले को लेकर जैसे ही सूचना महासचिव डॉ. चंद्र गर्ग के पास पहुंची तो उनकी ओर से प्रधान के नाम 13 अप्रैल को पत्र लिखा गया है। इसमें बताया कि संस्था में कार्यरत कुछ स्टाफ सदस्यों को बिना गवर्निंग बॉडी में पास करवाए सेवामुक्त किया जा रहा है। जबकि संस्था के संविधान में गवर्निंग बॉडी के अधिकार व कर्तव्यों में धारा 21 नौ के अंदर स्पष्‍ट लिखा गया है। ऐसे में अनुरोध है कि यदि किसी स्टाफ सदस्य को सेवामुक्त करना जरुरी हो तो उसे आगामी गवर्निंग बॉडी बैठक के एजेंडे में शामिल करके विचार-विमर्श किया जाए। इसके बाद ही आगामी कार्यवाही की जाए। किसी भी संस्था में यदि किसी स्टाफ सदस्य को सेवामुक्त किया गया है तो उसे तुरंत बहाल किया जाए।

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