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कमेटियां पायलट प्रोजेक्ट के जरिए यूजी प्रथम वर्ष का पाठ्यक्रम करेंगी तैयार

3 वर्ष पहले
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प्रदेश के कॉलेजों में उच्चतर शिक्षा विभाग की ओर से पाठ्यक्रम बदलने को लेकर विश्वविद्यालयों के विरोध को देखते हुए सुर बदले हुए नजर आने लगे हैं। डेढ़ दिन में पाठ्यक्रम बदलने की प्रक्रिया को अब पायलट प्रोजेक्ट बताया जाने लगा है। उच्चतर शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि वे अभी सिर्फ स्नातक स्तर के प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम को लेकर ही काम कर रहे हैं। इसमें स्नातक के अन्य दो वर्षों के पाठ्यक्रम को शामिल नहीं किया गया है। हालांकि पाठ्यक्रम को लेकर 11 कमेटियों की ओर से कुरुक्षेत्र और एमडीयू रोहतक विवि में कवायद शनिवार से शुरु कर दी गई है। वहीं शिक्षक फेडरेशन का विरोध भी बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि विवि की स्वायत्तता के खिलाफ उठाए जा रहे उच्चतर शिक्षा विभाग के फैसलों को वापिस नहीं लिया गया तो वे परीक्षा के बाद इनके मूल्यांकन ना करने जैसा बड़ा कदम भी उठा सकते हैं। लगातार विवि की स्वायत्तता पर हस्तक्षेप किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

5 विषयों की कमेटी ने फाइनल की रिपोर्ट

एमडीयू में शनिवार को सीबीसीएस के 5 विषयों की कमेटियां पहुंची। इनमें बॉटनी, जूलॉजी, केमेस्ट्री, भूगोल व मैथ्स की कमेटी शामिल रही तो कुरुक्षेत्र में अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान, फिजिक्स, कंप्यूटर साइंस व कॉमर्स के विषय लिए गए हैं। अब इन कमेटियों की ओर से रविवार दोपहर एक बजे तक रिपोर्ट फाइनल कर दी जाएगी। इसके बाद विभाग की ओर से सोमवार को इन 11 विषयों के बारे में सरकार को रिपोर्ट देकर सभी 10 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के पास भेजने की मंजूरी ली जाएगी। हालांकि पाठ्यक्रम तय करने का अंतिम फैसला एसी की ओर से ही लिया जाएगा।

प्रिंसीपल को फोन कर मांगें नाम और बना दीं कमेटियां

पाठ्यक्रम बदलने के लिए कमेटियां बनाने की प्रक्रिया एक ही सप्ताह के अंतराल में ही पूरी कर दी गई। कमेटी गठन के लिए कॉलेजों के प्रिंसीपल से बात कर नाम मांगें गए और 8 से 30 वर्ष के अनुभव वाले शिक्षकों के नाम लिए गए। इसके बाद एक ही दिन में तय कर लिया कि किन शिक्षकों को कमेटी में शामिल किया जाएगा।

रोहतक. एमडीयू में यूजी के पाठ्यक्रम को बदलने के लिए बैठक करते हायर एजूकेशन कमेटी के सदस्य।

पाठ्यक्रम बदलने की प्रक्रिया
हर विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम बदलने के लिए पीजी बोर्ड ऑफ स्टडीज और यूजी बोर्ड ऑफ स्टडीज होता है। इससे पहले हर विषय की विभागीय समिति के एक्सपर्ट की ओर से मंथन किया जाता है। इसके बाद पाठ्यक्रम को बोर्ड आफ स्टडीज में रखा जाता है। इस बोर्ड में बाहर केे भी विषय विशेषज्ञ होते हैं। इससे पाठ्यक्रम पारित होने के बाद एक फैकल्टी यानि संकाय के पास इसे भेजा जाता है। इसे पास होने के बाद यह शैक्षणिक परिषद में जाता है। यहां एसी से अंतिम मोहर लगती है।

हरियाणा उच्चतर शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. बीके कुठियाला शनिवार को एमडीयू पहुंचे। कुलपति प्रो. बिजेंद्र कुमार पुनिया ने उनका स्वागत किया। प्रो. बीके कुठियाला हरियाणा उच्चतर शिक्षा परिषद के अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार एमडीयू के फैकल्टी हाउस पहुंचे थे।

सही कमेटी बने
प्रदेश सरकार यदि सभी विवि में एक जैसा पाठ्यक्रम लाना चाहते हैं तो यह काम कॉमन सिलेबस कमेटी से करवाना चाहिए। इसमें सभी विवि के विषय विशेषज्ञ राज्यपाल की ओर से नामित होते हैं। वहीं कमेटी बनाई जा सकती है। यहां पर फिलहाल चेहरा देखकर विशेषज्ञों को लगा दिया गया है। इसमें शिक्षकों को सामने आना चाहिए। इस तरह का सरकार का काम विवि की स्वायत्तता और उनके आर्डिनेंस पर प्रहार है। यदि सरकार ऐसा करना भी चाहती है तो राज्यपाल की ओर से बनाई गई कॉमन सिलेबस कमेटी की मीटिंग बुलाकर ये काम करवा सकती है। सरकार को यदि करना भी है तो कहे कि सभी विवि के डीन, एचओडी आएंगे या वरिष्ठ प्रोफेसर आएंगे। नाम चुनकर अपनी मनमर्जी करना गलत है। सरकार और आईएएस विवि को रिमोट कंट्रोल से चलाना चाहते हैं, जो भविष्य के लिए खतरा है। डॉ. एसपीएस दहिया, पूर्व रजिस्ट्रार एवं अंग्रेजी विषय पूर्व एचओडी।

विवि की स्वायत्तता को दरकिनार कर पाठ्यक्रम बदलना गलत है। इस मामले में उच्चतर शिक्षा परिषद के अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी बात रखी जाएगी। यदि इसके बाद भी शिक्षकों की बात नहीं सुनी गई तो परीक्षा खत्म होने के बाद इनके मूल्यांकन ना करने जैसा भी फैसला लिया जा सकता है। डॉ. विकास सिवाच, एचफक्टो राज्य प्रधान एवं मडूटा प्रधान।

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