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‘नर-नारी एक-दूसरे को समान समझ सुखमय गृहस्थ जीवन बिताएं’

3 वर्ष पहले
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रोहतक | जिस घर परिवार में ब्रहमज्ञान का वास हो जाता है, वह घर स्वर्ग के समान हो जाता है। नर और नारी एक दूसरे के पूरक होते हैं, इसलिए उनमें ऊंच या नीच वाली भावना नहीं होनी चाहिए। दोनों को एक-दूसरे का सम्मान करते हुए सुखमय गृहस्थ जीवन जीना चाहिए। यह प्रवचन हिसार से आए संत परमजीत सिंह ने व्यक्त किए। वह गांव रिठाल नरवाल में हुए संत निरंकारी सत्संग में बोल रहे थे। इसमें संत ने कहा कि इंसान का अंहकार होता है, जो एक दूसरे को छोटा-बड़ा समझते है। मन से अहम जाते ही विनम्रता आ जाती है। फिर राम-कबीरा एक भयो, तो कोई न सके पहचानी वाली अवस्था भक्त को प्राप्त हो जाती है।

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