42 साल बाद फिर मिले दोस्त तो सतनाम कैंटीन की चाय-मठ्ठी से लेकर टेंट में बैठकर पढ़ने तक की यादों को किया ताजा
42 साल बाद भी सतनाम कैंटीन की मठ्ठी-फैन और गर्मागर्म समोसों के साथ चाय की चुस्की, पुरानी लाइब्रेरी में घंटों बैठकर किताबों को काला करना, आंखों के थक जाने पर टीचर क्लब में जाकर जगजीत की गजलों को सुनना, दोस्तों के नोट्स चुराना और उसी सब्जेक्ट में उनसे ज्यादा मॉर्क्स लेना, तपती दोपहरी में टैंटों के नीचे पढ़ना, टेस्ट में मुश्किल प्रश्न आने पर पूरी क्लास का वॉक आउट कर देना। बरसों बाद पुराने दोस्तों और शिक्षकों के साथ इन खट्टी-मीठी यादों को फिर से जिया गया एमडीयू के टैगोर ऑडिटोरियम में।
मौका था, रविवार को एमडीयू की एलुमिनाई मीट का। जिसमें पहले बैच 1976-78 से लेकर 2017 बैच तक के पास आउट विद्यार्थियों ने मिलकर खूब रंग जमाया। जहां कुछ सहपाठी अपने दोस्तों को मोटा, लंबू जैसे नाम से पुकारते हुए दिखाई दिए। वहीं, 20 साल के लंबे गैप के बाद दोस्तों से हुई मुलाकात से आंखें भीग आई।
इस खुशी-गम के माहौल को ओर भी हसीन कर दिया फूड एंड सिविल सप्लाइज के अतिरिक्त मुख्य सचिव आईएएस रामनिवास शर्मा ने। पुरानी लाइब्रेरी और यूथ फेस्टिवल में बिताए दिनों को शिद्दत से याद करते हुए जब आईएएस शर्मा ने अपनी पसंदीदा हरियाणवी रागिनी ‘ मन्नै देख्या ढंग निराला-बाग में कट रह्या था एक चालया, ओ परदेसी सुनता जा बात लड़ाई की’ गाई तो पूरा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। एल्युमनाइज की डिमांड पर आईएएस शर्मा ने ‘पर्दा है-पर्दा है’ कव्वाली गाकर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद एलुमनी विनय सैनी ने फूलों की रानी, बहारों की मल्लिका गाना गाया। फिर शीतल चहल ने मुझे तुम याद आए, कांटों से खींच के ये आंचल, ए दिल मुझे बता दे जैसे सरीखे गानों से पूरे माहौल को खुशनुमा बना दिया। पुरानी यादों के तारों के बीच एलुमनी डाॅ. सौरभ वर्मा ने हिंदी, हरियाणवी और पंजाबी गीतों की जुगलबंदी पेश की।
एमडीयू के 1995 बैच के स्टूडेंट रहे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश शर्मा, पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के अध्यक्ष बिजेन्द्र अहलावत व अन्य आपस में मिलते हुए।
यंग बने रहना है तो जिंदगी में एडवेंचर को शामिल करें: आरएस डबास
पहले बैच 1976-78 इमसॉर के एलुमनी काॅरपोरेट लीडर एवं मोटीवेशनल स्पीकर आरएस डबास ने एल्युमिनाइज को ‘डर के आगे जीत है’ का मंत्र दिया। डबास ने किस्सा सुनाया कि शुरुआत में एमबीए से कोई रूबरू नहीं था। सुनने वाले कहते थे कि यह ना तो बीए है और ना ही एमए। शुरू में डिग्री करने के बाद नौकरी तो मिली नहीं थी आैर शादी भी नहीं हो रही थी। फिर विज्ञापन दिया। इसमें भी हरियाणा से एक भी नहीं और यूपी से रिश्तों की कतार लग गई, खैर शादी भी हो ही गई और नौकरी भी मिल गई। इस किस्से ने एल्युमिनाइज को खूब गुदगुदाया।
रोहतक. एलुमनी मीट में रागिनी सुनाते आईएस रामनिवास।
रोहतक. एलुमनी मीट में रागिनी सुनाते आईएस रामनिवास।
प्रोफेसर पिलाते थे चाय: प्रो. कायत
बैच 1982 से 1995 तक एक लंबा सफर एमडीयू में बिताया सीडीएलयू, सिरसा के कुलपति प्रो. विजय कायत ने। यहीं पढ़ते-पढ़ते जब लेक्चर की नौकरी मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उनके दिन-रात लाइब्रेरी में ही बिता करते थे। लगातार पढ़ते हुए देख खुद प्रोफेसर उनको चाय देकर जाया करते थे। यह विवि नहीं, उनकी मां है। जिसने उनके अंदर शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक संस्कार भरे।
इनविटेशन ना देने पर जताई आपत्ति, बॉलकनी रही खाली
विवि की एलुमनी कमेटी पर आरोप लगाया कि वह अपने विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित एल्युमिनाइज को भूल गई है। हालांकि, एमडीयू प्रशासन एलुमनी में 1700 एल्युमिनाइज की उपस्थिति का दावा कर रहा है, पर सभागार की बालकनी बिल्कुल खाली थी। सभागार भी पूरी तरह से भरा नहीं हुआ था। कहीं-कहीं कुछ पंक्तियां खाली रही। कार्यक्रम शुरू होने के दो घंटे बाद सभागार में पूर्व विद्यार्थियों की रौनक दिखाई दी। एलुमनी विवि काे रेटिंग दे सके, इसके लिए सभी एलुमनी से फीडबैक फार्म भी भरवाए गए। इसमें उनसे विवि में सुधार और बेहतरी के लिए सुझाव भी मांगें गए।
जस्टिस शर्मा ने खोला राज, बोले :दोस्तों के नोट्स पढ़, उनसे ज्यादा मॉर्क्स ले लिए
1995 बैच के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश शर्मा 20 साल बाद जब अपने बदमाश गैंग से मिले तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने बताया कि पूरे एक महीने दिन-रात मेहनत कर दोस्तों ने जो नोट्स बनाएं थे, उन्होंने उसे सिर्फ एक रात ही पढ़ा। ताज्जुब की बात ये थी इस सब्जेक्ट में उनके सभी दोस्तों से ज्यादा मॉर्क्स आएं। मिलते ही एडवोकेट यतेंद्र नाथ को टाइगर और सुरेंद्र को लंबू कहकर पुकारा गया। एडवोकेट चंद्रशेखर पाटनी और सतीश शर्मा ने बताया कि चंडीगढ़ में मूक कोर्ट के लिए जाना था। उनके दोस्त खुद सबको उठाने के चक्कर में टूर पर जा नहीं पाए। यह किस्सा याद कर आज भी बहुत हंसी आती है।
टेंटों में करते थे पढ़ाई : डॉ. गर्ग
पहले बैच 1976 के हिंदी डिपार्टमेंट के छात्र डॉ. ओपी गर्ग ने बताया कि इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाअों में एमडीयू बहुत ज्यादा बदल गया है। पहले 9 विषय और 4 फैकल्टी होती थी, आज 38 विषयों के विभागों के साथ 11 फैकल्टी है। यहां सारा सूखा जंगल था, इतनी हरियाली नहीं थी। उन्हें जंगल के बीच टेंटों में बैठकर पढ़ाई का दौर आज भी याद आता है। तब वीसी हरिद्वारी लाल होते थे।
कक्षाओं में जाकर दी हाजिरी, संगीत विभाग में जाकर ने किया रियाज
टैगोर ऑडिटोरियम में हुए मुख्य कार्यक्रम के बाद सभी एल्युमिनाइज अपने-अपने विभागों में गए। पहली बार विभागों में हुई एलुमनी में एल्युमिनाइज की एसोसिएशन का गठन भी किया गया। जहां मनोविज्ञान विभाग में एल्युमिनाइज ने अपनी पुरानी कक्षाओं में जाकर हाजिरी दी। वहीं, संगीत विभाग में तबला, हरमोनियम और सितार पर अपने एचओडी डॉ. हुक्मचंद के साथ रियाज किया। डिफेंस विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर रिंकू ने बताया कि प्रो. आरएस सिवाच की क्लास बहुत लंबी होती थी, वह शाम 4 बजे तक पढ़ाते थे और क्लास यह कहकर छोड़ते थे कि अब तुम्हें भूख लगी होगी।
रोहतक. डिफेंस विभाग में एलुमनी को संबोधित करते प्रो. आरएस सिवाच।
केकेआर टीम के खिलाड़ी आशीष परमार भी पहुंचे
डिफेंस विभाग में केकेआर टीम के खिलाड़ी आशीष परमार भी पहुंचे। वह छह बार नेशनल, सात बार स्टेट और तीन बार बीसीआई बोर्ड से अवार्ड जीत चुके हैं। फिलहाल लक्ष्य एनआईएस की परीक्षा देना है, इसलिए नेवी में मिली नौकरी को छोड़ दिया।
पर्यटन स्थल पर बनाएंगे एलुमनाई होम: बीके पूनिया
एल्युमिनाइज से रूबरू होते हुए एमडीयू के प्रो. बिजेंद्र कुमार पुनिया ने कहा कि भविष्य में पूर्व विद्यार्थियों के लिए पर्यटन स्थल पर एलुमनाई होम बनाने की योजना है। इसके लिए कॉरपोरेट फंड भी बनाया है। जिसमें सभी पुराने स्टूडेंट, शिक्षकों के साथ आने वाले एल्युमिनाई की भी मदद ली जाएगी। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य एल्युमिनाइज को पारिवारिक माहौल देना है। साथ ही, टैगोर सभागार के कॉरिडोर में हरियाणवी पेंटिंग्स की डिजिटल पेंटिंग एग्जीबिशन भी लगाई जाएगी।
फ्लाइंग ऑफिसर ज्योति ने भी बांटा अपना अनुभव
बैच 2018 में पास आउट हुई ज्योति देशवाल हाल ही में फ्लाइंग ऑफिसर बनी है। वह जुलाई में मैसूर ज्वाइन करेंगी। देशवाल ने बताया कि लक्ष्य तय था और इसे हासिल करने में विभाग के शिक्षकों का भी पूरा सहयोग रहा।