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ढाई हजार वर्ष से अभ्यास और अनुभव से जुड़ा है वर्षी तप

3 वर्ष पहले
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जैन धर्म की दृष्टि में वर्षी तप आध्यात्मिक अनुष्ठान है। इसमें साधक का मूल लक्ष्य चित्त शुद्धि है, जबकि वर्ष भर चलने वाले इस तप से लोगों को निरोगी काया भी मिलती है। जैसे गेहूं की फसल के लिए खेती करने वाले किसान को तूड़ा फ्री में मिलता है। ये उद्गार जैन संत अरुण मुनि महाराज के हैं। जनता कॉलोनी के जैन स्थानक में बातचीत में उन्होंने कहा यह वर्ष भर चलने वाला पूर्ण वैज्ञानिक अनुष्ठान है। तभी ढाई हजार वर्ष से यह निरंतर साधकों के अभ्यास, अनुभव व प्रयोग में है। जीवन में अारोग्यता व सरलता आदि इसके भौतिक लाभ भी हैं।

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चांदी की लुटिया में गन्ने के रस से खोलेंगे व्रत

इधर जनता काॅलोनी के जैन स्थानक में वर्षीतप पारणा महोत्सव समिति के चेयरमेन जगदीश राय जैन ने रविवार को प्रेसवार्ता में बताया कि कार्यक्रम में एक साथ 150 साधक वर्षी तप पारणा व्रत खोलेंगे और नया व्रत धारण भी करेंगे। सभी तपस्वियों का जैन समाज की ओर से अभिनंदन किया जाएगा। साथ ही चांदी की लुटिया में गन्ने के रस से उनका व्रत खुलवाया जाएगा। यह धार्मिक कार्यक्रम जैन संत अरुण मुनि महाराज, योगीराज आगम मुनि महाराज, महा साध्वी शांति महाराज, सुषमा महाराज, मनीषा महाराज, सारिका महाराज के सानिध्य में होगा। समिति के सदस्य पवन जैन ने बताया कि इस कार्यक्रम मे हरियाणा, पंजाब, उतर प्रदेश, दिल्ली व हिमाचल प्रदेश के श्रद्धालु कार्यक्रम में भागीदारी करेंगे। पंच परमेष्ठी युवा मंडल के अध्यक्ष विवेक जैन ने बताया कि कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों श्रद्धालुओं के लिए जलपान आदि का विशेष प्रबंध किया गया है।

यह है वर्षी तप पारणा महोत्सव

जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने एक साल तक घोर तपस्या की। इस दौरान उन्होंने अन्न व जल का पूर्णत: त्याग कर दिया। एक वर्ष के पश्चात भगवान ने गन्ने के रस से ऋषभदेव का व्रत खुलवाया। ढाई हजार साल पुरानी इसी मान्यता के आधार पर आज भी जैन भक्त एक दिन उपवास व एक दिन भोजन का विधान रखते हुए 365 दिन का अनुष्ठान करते हैं। इसमें सूर्यास्त के बाद भोजन व पानी ग्रहण करना वर्जित है।

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