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जो समाज सवाल करेगा वही प्रगति करेगा : अमित

3 वर्ष पहले
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जो समाज सवाल करता है, वो प्रगति करता है। लेखक का कार्य है सवाल करना। समय के ज्वलंत मुद्दों पर सवाल करना, समाज की विसंगतियों पर सवाल करना। यही सवाल साहित्य के रूप में सृजित होते हैं। मेरा यार मरजिया उपन्यास के लेखक अमित ओहल्याण ने ये उद्गार मंगलवार को एमडीयू में दिए। संत साहित्य शोध पीठ की ओर से समय से साक्षात्कार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का विषय पितृ-सत्तात्मक व्यवस्था और हमारा समय-समाज रहा। लेखक अमित ने कहा कि हमारे सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों में गिरावट आई है। उनका उपन्यास इस समाज के परिवेश तथा वर्तमान घटनाक्रम से प्रेरित हैं। संत साहित्य शोध पीठ की अध्यक्षा प्रो. रोहिणी अग्रवाल ने कहा कि पितृ सत्तात्मक व्यवस्था बीमार मानसिकता का प्रतीक बन गई है। उन्होंने कहा कि साहित्य प्रतिरोध का सशक्त माध्यम है। मनुष्य की अस्मिता का अध्ययन साहित्य करता है। उन्होंने कहा कि स्त्री पितृसत्ता का सूरज निगल सकती हैं, अगर वे ज्ञान के रास्ते पर चलें। संगोष्ठी में एमडीयू की हरियाणा अध्ययन केन्द्र निदेशिका प्रो. अंजना गर्ग ने कहा कि दुख की बात है कि पितृ सत्तात्मक व्यवस्था वर्षों से ज्यों की त्यों है। उन्होंने कहा कि बेटियों के साथ समाज में भेदभाव होता है- चाहे वो पौष्टिक भोजन की बात हो, या उच्च शिक्षा की बात हो, चाहे उनका आजादी देने की बात हो। महिलाओं के अस्तित्व पर प्रश्न करते हुए कहा कि ये कैसा समाज है, जिसमें छोटी बच्चियों से लेकर वृद्ध महिलाओं तक यौन हिंसा का शिकार होती हैं। इस मौके पर हिन्दी विभाग की अध्यक्षा प्रो. सुशीला कुमारी, प्रो. कृष्णा जून, डा. श्रुति सुधा आर्य, डा. सतीश डांगी, शुभम, प्रोफेसर सुनित मुखर्जी आदि मौजूद रहे।

रोहतक. साक्षात्कार संगोष्ठी को सबोधित करते हुए मुख्य वक्ता।

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