अक्षय तृतीया पर प्रदेश में पहली बार वर्षीतप पारणा महोत्सव अाज
सकल जैन समाज की ओर से अक्षय तृतीया के मौके पर वर्षीतप पारणा महोत्सव मनाया जाएगा। यह महोत्सव वैश्य हाई स्कूल परिसर में 18 अप्रैल को किया जाएगा। यह कार्यक्रम गुरूदेव सुदर्शन लाल के सुशिष्य आगम ज्ञाता युवा प्रेरक योगीराज आगम मुनि आदि ठाणे-7, महासाध्वी शांति महाराज ठाणे-3, महासाध्वी सुषमा ठाणे-5, मनीषा महाराज ठाणे- 8, सारिका महाराज ठाणे-2 के सानिध्य में हो रहा है।
वर्षीतप पारणा महोत्सव समिति के चेयरमैन जगदीश राय जैन ने बताया कि यह कार्यक्रम प्रदेश में पहली बार होने जा रहा है। जहां एक साथ 150 के लगभग लोग अपना व्रत खोलेंगे व नया व्रत धारण करेंगे। सभी तपस्वी आत्माओं का समाज के जरिए मान- सम्मान किया जाएगा व गन्ने के रस से व्रत खुलवाया जाएगा। कार्यक्रम में हरियाणा, पंजाब, उतर प्रदेश, दिल्ली व हिमाचल प्रदेश के भक्त हिस्सा लेंगे व इसके साक्षी बनेंगे। इस कार्यक्रम के लिए समिति के सदस्य दिन-रात तैयारियों में जुटे हुए हैं। इससे कार्यक्रम को सुचारू रूप से सम्पन्न किया जा सके।
प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव से जुड़ी मान्यता
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने एक साल तक घोर तपस्या की थी, जिसमें उन्होंने अन्न व जल का पूर्णत त्याग कर दिया था। एक वर्ष के पश्चात भगवान ने इक्षु रस (गन्ने का रस) से ऋषभदेव व्रत खुलवाया। इसी मान्यता के जरिए जैन लोग भी एक दिन व्रत (उपवास) व एक दिन खाना होता है। सूर्य अस्त के पश्चात पानी भी नहीं पीना होता है। इसके दौरान ब्रह्मचारी व्रत का पालन करना होता है।