स्टेशन पर छोड़ गए 9 माह की बच्ची, 10 घंटे पुलिस वालों ने दूध पिलाकर व खिलौनों से संभाला
समय : अलसुबह करीब 4 बजे। स्थान : रेलवे स्टेशन का यात्री प्रतीक्षालय। आठ माह की एक मासूम बच्ची काफी देर से बिलख रही है। चेकिंग पर निकले टीसी शंकर के कानों तक मासूम के बिलखने की आवाज पहुंचती है। वे फौरन दौड़कर बच्ची के पास पहुंचते हैं। फर्श पर लावारिस हालत में देख टीसी को यह समझने में देर नहीं लगी कि कोई उस बच्ची को छोड़ गया है।
टीसी शंकर फौरन पूछताछ केंद्र से अनाउंसमेंट कराते हुए जीआरपी को सूचना देते हैं। जीआरपी से मुस्कान टीम के इंचार्ज एएसआई रणबीर सिंह, बलवान सिंह, राममेहर, हेड कांस्टेबल सुनीता व सतीश वेटिंग हाल में पहुंचते हैं। बिलख रही मासूम के माता पिता की पूरे स्टेशन परिसर पर तलाश कराई जाती है, लेकिन सफलता नहीं मिलती। अपराधियों को सबक सिखाने के लिए बने जीआरपी थाने में बुधवार का नजारा कुछ हटकर था। जीआरपी थाने में 10 घंटे तक स्टाफ से किसी ने बच्ची के लिए दूध की बोतल तो किसी ने नए कपड़े तो किसी ने खिलौने लाकर उसे संभाला। मासूम बच्ची को भूख से बिलखते देख किला मोहल्ला निवासी बबीता ने उसे दूध पिलाकर चेहरे पर मुस्कान लौटाई। एसएचओ नरेंद्र सिंह, एसआई जितेंद्र कुमार, एएसआई बलवान सिंह, एएसआई रणबीर सिंह, महिला कांस्टेबल शक्ति, हेड कांस्टेबल सुनीता सहित समस्त स्टाफ मासूम बच्ची की किलकारियों को सुनकर उसकी देखभाल में जुटा रहा।
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने की जांच
जीआरपी एसएचओ नरेंद्र सिंह ने बताया मां-बाप बच्ची को जानबूझ कर छोड़कर चले गए हैं। फिलहाल बच्ची को रेवाड़ी बाल भवन भेज दिया गया है। दोपहर में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया गया। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सदस्य गनेश कुमार, उमा, नीलम, पूजा, किरन ने केस की जांच की। जीआरपी थाने में टीसी शंकर के बयान पर धारा 317 के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।
फर्श पर ममता
वेटिंग रूम में रोती मिली बच्ची, माता-पिता का नहीं चला पता, बाद में रेवाड़ी बाल भवन में भेजा
सीसीटीवी लगवाने का प्रस्ताव फाइलों में दबा कैमरे होते तो पता चल जाते बच्ची के गुनहगार
ए ग्रेड रेलवे स्टेशन के तीनों प्लेटफार्म पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। लिहाजा यहां पर होने वाली घटनाओं और हादसों का जीआरपी-आरपीएफ पता नहीं लगा पाती। रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रस्ताव पिछले एक साल दिल्ली मंडल के फाइलों में दबा हुआ है। जीआरपी थाने में जरुर तीन कैमरे लगे हैं, जिनके जरिए थाने के आगे और पीछे के हिस्से पर आने जाने वाली की रिकॉर्डिंग हो जाती है। लेकिन शेष अन्य हिस्सों पर कैमरे नहीं होने से यात्रियों की सुरक्षा रामभरोसे ही रहती है।