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वीसी ने खेलों के लिए मांगा डेढ़ करोड़, युवा कल्याण विभाग ने किया इनकार

3 वर्ष पहले
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एमडीयू में स्पोटर्स बोर्ड की ओर से करवाए जाने वाले वार्षिक खेल पारितोषिक समारोह के आयोजन पर संकट के बादल छाने लगे हैं। समारोह होने से पहले ही विवादों में छा गया है। खेल कार्यालय की ओर से इस समारोह के आयोजन के लिए डेढ़ करोड़ रुपए का बजट तय किया है, ताकि खिलाड़ियों को सम्मानित किया जा सके, लेकिन अपने पास बजट ना होने का भी रोना रोया है।

ऐसे में खेल कार्यालय की ओर से बजट के लिए फाइल कुलपति के पास भेजी गई। विवाद तब गहरा गया जब कुलपति की ओर से भी इस खेल समारोह के आयोजन के लिए डेढ़ करोड़ रुपए का बजट देने के लिए फाइल युवा कल्याण विभाग निदेशक के पास भेज दी और निदेशक की ओर से फाइल को लौटा दिया गया।

एमडीयू में वार्षिक खेल पारितोषिक समारोह आयोजित करवाने की राह में डेढ़ करोड़ रुपए बजट बना बाधा, स्पोर्ट्स और युवा कल्याण विभाग में ठनी

युवा कल्याण की राशि मत छेड़ें

खेल समारोह के लिए अलग से बजट होने के चलते युवा कल्याण विभाग ने भी राशि देने से इंकार कर दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि इस मामले में युवा कल्याण की राशि को खेल के मामले में खर्च नहीं किया जा सकता है। यदि बजट दिया ही जाना है तो विवि के मुख्य बजट से इस राशि को खर्च किया जाए। दरअसल खेल कार्यालय की ओर से सालभर में खेलों में नाम रोशन करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाता है।

अपना बजट खर्च करे खेल विभाग या विवि के बजट से लें राशि

हर विभाग का अपना एक बजट होता है, जोकि सालाना तय होता है। यह उसी एक्टीविटी के लिए ही खर्च होता है, जिसके लिए वह बच्चों से लिया गया है। खेल विभाग अपने मद से बजट लें या विवि के मुख्य बजट से राशि ली जाए। यदि कुलपति को लगता है तो वे सारी राशि ले सकते हैं, लेकिन अलग विभाग और मद बनाने और विवि कैलेंडर बनाने का फिर औचित्य ही क्या हैं? - डॉ. जगबीर राठी, निदेशक, युवा कल्याण विभाग, एमडीयू।

विवि कैलेंडर भी नहीं देता इजाजत

विवि कैलेंडर की बात करें तो हर विभाग का सालाना बजट तय किया जाता है, उसी के तहत ही एक्टिविटी करने की भी प्लानिंग बनानी होती है। अब ऐसा करने से विवि कैलेंडर की भी अवहेलना की जा रही है। इतना ही नहीं इस मामले में कुलपति की ओर से बिना रायशुमारी किए फाइल युवा कल्याण विभाग के पास भेजी गई है।

यूथ फेस्टिवल को नहीं किया आवेदन

ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी की ओर से इस बार उत्तर भारत में अंतर विवि का राष्ट्रीय यूथ फेस्टिवल का आयोजन करवाया जाना था। यह आयोजन एमडीयू को भी मिल सकता था, जिससे विवि की प्रतिभाओं को अपने ही क्षेत्र में मौका मिल पाता, लेकिन इस मामले में प्रपोजल ही नहीं होने दिया गया। राशि खर्च होने का कारण देकर फाइल को वापस मंगवा लिया गया है।

खिलाडियों की प्राइज मनी कम नहीं करेंगे

एमडीयू में खिलाड़ियों को बजट की कमी की वजह से परेशान नहीं होने दिया जाएगा। प्राइज मनी को कम नहीं किया जा सकता है। बच्चों के लिए स्पोर्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा। उनका कोई नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। असल में खिलाड़ियों के इवेंट ज्यादा होते हैं। स्टूडेंट्स का ही पैसा है, उन्हीं के लिए खर्च होना है। इसमें किसी तरह का कोई विवाद नहीं है। - प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया, कुलपति, एमडीयू।

यूं एकत्र होती है राशि

एमडीयू के स्टूडेंट्स से फीस के समय राशि ली जाती है। इसमें 60 रुपए फीस में से 40 युवा कल्याण विभाग में जाते हैं। इसी तरह का फंड स्पोट्र्स का भी एकत्र होता है। अब युवा कल्याण विभाग के पास 14 एफडीआर और 5 से 6 करोड़ अलग राशि है। इस राशि से युवा कल्याण कार्यालय की ओर से स्टूडेंट्स को स्टाइपेंड, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, दो सभागारों की मेंटीनेंस की जाती है।

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