आशा वर्कर्स फरवरी में हुए समझौते को लागू करवाने के लिए दोबारा 7-8 जून को हड़ताल पर जा रही हैं। यदि सरकार तब तक भी नोटिफिकेशन जारी नहीं करती है तो हड़ताल को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाया जा सकता है। इससे पहले 22 मई को राज्य के सभी जिलो में सीएमओ कार्यालयों पर प्रदर्शन करते हुए हड़ताल के नोटिस दिए जाएंगें। वहीं 27 से 29 मई के बीच आशा वर्कर्स एक दिन जिले में मुख्यालयों पर विधायकों, मंत्रियों के दरवाजों पर प्रदर्शन करते हुए पहुंचेगी। यह निर्णय रविवार को कर्मचारी भवन में आयोजित आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा की राज्य स्तरीय कन्वेंशन में लिया गया। कन्वेंशन में राज्य के तमाम जिलों से 300 से ज्यादा यूनियन प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कन्वेंशन की अध्यक्षता प्रवेश कुमारी ने की। यूनियन की प्रदेश महासचिव सुरेखा ने कहा कि सरकार ने आशा वर्करों के आंदोलन के चलते एक फरवरी को समझौता किया था। परन्तु लगभग चार महीने गुजरने को हैं परन्तु उस समझौते को लागू नहीं किया जा रहा है। इस बीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज व विभाग के अधिकारियों से कई बार वार्ताएं हुई हैं। उन्होंने हर बार आश्वासन दिया है कि जल्द ही स्वीकृत मांगों का नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा। स्वयं स्वास्थ्य मंत्री 26 अप्रैल को व मुख्यमंत्री महोदय के कार्यालय से 27 अप्रैल को वेतन बढ़ोत्तरी को लेकर बयान आ चुके हैं, लेकिन आज तक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया। जिसके चलते दोबारा से आशाओं को हड़ताल में उतरने जैसा कदम उठाना पड़ रहा है। सीटू के प्रदेश महासचिव जयभगवान ने कहा कि राज्य सरकार 20 हजार आशाओं के साथ विश्वासघात कर रही है। आशाएं सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए दिन-रात एक कर रही हैं, परन्तु सरकार वर्कर्स के साथ किए गए समझौते तक को लागू नहीं कर रही। सरकार जल्द से जल्द आशाओं की स्वीकृत मांगों का नोटिफिकेशन जारी करें। कन्वेंशन को यूनियन राज्य नेताओं सुनीता, सर्बजीत, रानी, रोशनी, कमलेश, सुधा, नीलम, मीरा, सुमन, सुदेश, अनीता, मंजु, सीमा, अंजु, पूनम, सुनीता, गीता, शीला, राजबाला आदि ने संबोधित किया। कन्वेंशन ने प्रस्ताव पारित करके नगरपालिका कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से मांग की कि आंदोलनकारियों की मांगों का तुरंत समाधान करें।