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वीडियाे कांफ्रेंस से डॉक्टर दे सकेंगे गवाही, मरीजों को नहीं करना पड़ेगा इंतजार

3 वर्ष पहले
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अब पीजीआई के डॉक्टरों को गवाही के चक्कर में अदालतों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। न ही डॉक्टरों की अनुपस्थिति के चलते मरीजों को इधर उधर भटकना पड़ेगा। पीजीआई के फॉरेंसिक मेडिसन विभाग में वीडियो कांफ्रेंसिंग शुरू हो गई है। डॉक्टरों ने वीसी के जरिए कोर्ट में गवाही देनी शुरू कर दी है। अभी तक पीजीआई पुलिस केस से जुड़ मामलों में डॉक्टरों द्वारा की गई कार्रवाई की गवाही के संबंध में कोर्ट में जाना पड़ता था। कई मामलों में डॉक्टरों को दूसरे जिलों की कोर्ट में भी गवाही देने के लिए जाना पड़ता था। इस कारण डॉक्टर का पूरा दिन आने जाने में ही बीत जाता था। इस व्यवस्था के शुरू होने से रुपये की भी बचत हुई है। अधिकतर डॉक्टर अपनी जेब से रुपये खर्च करके ही कोर्ट जाते थे। करीब बीस लाख रुपये की लागत से फोरेंसिक मेडिसन विभाग में वीडियो कांफ्रेंसिंग का उपकरण लगा दिया गया है। यहां पर एक रजिस्टर में रखा गया है। जिसमें गवाही देने आने वाले डॉक्टर का नाम सहित अन्य डिटेल होती है। हालांकि प्रदेश के अधिकतर सिविल अस्पताल में वीसी के जरिए गवाही की व्यवस्था पहले ही शुरू हो चुकी है। सिविल अस्पतालों में डॉक्टरों की संख्या कम होने से जल्दी व्यवस्था शुरू की गई थी।

कोर्ट में पेश होने पर मरीजों

को झेलनी पड़ती थी परेशानी

डॉक्टरों के व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने पर सबसे बड़ी परेशानी मरीज को झेलनी पड़ती थी। कोर्ट में डॉक्टर की पेशी की जानकारी नहीं होने पर मरीज जांच के लिए पीजीआई में आ जाते थे। यहां आने पर मरीज को पता चलता था कि डॉक्टर गवाही के लिए कोर्ट में गये है। इसके बाद डॉक्टर के इंतजार में मरीज दिनभर पीजीआई में बैठे रहते थे। वीसी की व्यवस्था शुरू होने के बाद मरीजों को भी सहुलियत मिलेगी। ओपीडी में डॉक्टर की मौजूदगी होने पर वह समय पर जांच करवा सकेंगे।

महीनेभर में होती है करीब 150 डॉक्टर की गवाही : यदि कोर्ट में डॉक्टरों के आंकड़ों पर नजर डाले तो अब एक महीने में करीब 150 डॉक्टर वीसी के जरिए गवाही देते है। वीसी से ही डॉक्टर अदालत में सबूत पेश करते है। व्यवस्था शुरू होने के बाद अब यदि किसी डॉक्टर की ओटी में ड्यूटी लगी हुई है तो वह दस मिनट का समय निकालकर आसानी से गवाही दे सकता है।

मरीजों को सुविधा बढ़ाने के लिए उठाया यह कदम

डॉक्टर और मरीज की सहुलियत के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए गवाही की व्यवस्था शुरू हो गई है। अब डॉक्टर अपनी गवाही की तारीख पर विभाग में आकर वीसी के जरिए गवाही व सबूत पेश करते है। वीसी की व्यवस्था होने से न तो मरीज को इंतजार करना पड़ता है और न ही डॉक्टर को दिनभर परेशान होना पड़ता है।-डॉ. एसके धत्तरवाल, विभागाध्यक्ष फोरेंसिक मेडिसन विभाग पीजीआई

इन मामलों में डॉक्टरों को

जाना पड़ता है कोर्ट

पीजीआई में आने वाले लड़ाई झगड़े, किसी कानूनी केस के संबंध में डॉक्टरों को कोर्ट के आदेशानुसार गवाही देने के लिए पेश होना पड़ता है। इन मामलों में जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों को लेकर कोर्ट में जाना होता है। कई बार क्रास एग्जामिनेशन के लिए पेशी होती है।

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