डॉ. प्रवीण मल्होत्रा और मेडिसन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप गोयल ने पूरे विश्व में 19 मई को मनाए जाने वाले विश्व इन्फ्लेमेटरी बाउल रोग (आईबीडी) दिवस के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए दिवस को मनाया जाता है। यह एक ऑटो इम्यून बीमारी है। इसकी पहचान डायरिया, शौच के साथ पस व खून, एनिमिया, कमजोरी, वजन और कार्य क्षमता कम होने से होती है। आईबीडी दो प्रकार की होती है। पहली अल्सरेटिव कोलाइटिस और दूसरी करोहन डिसीज है। उन्होंने कहा कि अल्टरनेटिव कोलाइटिस आमतौर पर बड़ी आंत को प्रभावित करती है, जबकि करोहन बीमारी छोटी व बड़ी आंत दोनों को ही प्रभावित करती है। डॉ. संदीप गोयल ने बताया कि गत वर्ष करीब 150 से 200 मरीज इस बीमारी की समस्या के साथ पीजीआई की ओपीडी में आए। उन्होंने बताया कि आईबीडी का दूसरा प्रारूप करोहन डिसीज पेट, छोटी आंत व बड़ी आंत को प्रभावित कर सकती है। इसमें मरीज को बार-बार दस्त होना, दस्त में खून, पेट दर्द, आंतों में ऐंठन, कई बार आंत रुकने से उल्टियां व गैस पास न होना शामिल है।
निजी लैब में 1000 से 1500 रुपए में होती है जांच, पीजीआई में फ्री हाेगी
भास्कर न्यूज | रोहतक
गेहूं से फैलने वाली एलर्जी (सीलियक) की अब पीजीआई में फ्री में जांच शुरू कर दी गई है। इसकी जांच के लिए निजी अस्पताल में मरीजों से एक हजार से 1500 रुपये वसूले जाते थे। गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि सीलियक बीमारी से जुड़े 50 से 60 मरीज प्रतिदिन पीजीआई में आते हैं। अभी तक दूरबीन के माध्यम से जांच की जाती थी। अब माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग मे फ्री आईजीएटीजी एंटीबॉडी जांच की जा रही है। गेहूं की एलर्जी की बीमारी पकड़ने में सबसे पहला टेस्ट यही है। इसकी जांच के लिए ओपीडी में प्रत्येक शुक्रवार को 142 नंबर कमरे में सीलियक क्लीनिक चलाया जाता है। अभी तक करीब एक हजार मरीज क्लीनिक में पहुंच चुके हैं। डॉक्टर ने बताया कि पूरे देश में केवल पीजीआई में ही यह जांच फ्री की गई है। उन्होंने इसका श्रेय कुलपति डॉ. ओपी कालरा, कुलसचिव डॉ. एचके अग्रवाल, डीन डॉ. एमसी गुप्ता व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नित्यानंद को दिया।
गेहूं से एलर्जी की जांच व इलाज के लिए पीजीआई में चलाया जा रहा सीलियक क्लीनिक
19 मई को मनाएंगे आईबीडी दिवस, हर वर्ष आते हैं 200 मरीज