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बहादुरगढ़ में उत्तरी बाईपास में ड्रेन के एक ओर नहीं, दोनों तरफ बनेंगी सड़कें

3 वर्ष पहले
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उत्तरी बाईपास को तैयार करने में एक बार फिर से बदलाव किया गया है। पहले ड्रेन के एक तरफ ही दोनों सड़कों को बनाने की तैयारी थी, जिससे हर एक किलोमीटर पर पुलों को तैयार नहीं करना पड़े, लेकिन अब नए मैप के हिसाब से इसके दोनों तरफ सड़क बनाने का प्लान पास किया गया है, जिससे दोनों तरफ के लोगों को आने जाने के लिए सड़क मिल सके। दोनों तरफ सड़क बनाने में भी किसी की जमीन का अधिग्रहण तो नहीं करना पड़ेगा। इसके निर्माण के बाद इसके दोनों तरफ करीब 50-50 मीटर का क्षेत्र शेड्यूल रोड के रूप में होगा, जहां नियमों के हिसाब से कोई भी निर्माण कार्य नहीं होगा। इसके लिए गुरुग्राम की एक कंपनी से बाईपास की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी डीपीआर को तैयार करवाया जा रहा है। इसी माह के अंत तक कंपनी 8 लाख की लागत से बनी डीपीआर सरकार को सौंप देगी।

इस तरह मिलेगी जाम से राहत

इस बाईपास के बनने से शहर में जाम की स्थिति से काफी हद तक निजात मिल जाएगी क्योंकि एनएच-44 यानी सोनीपत, पानीपत, यूपी के मेरठ होते हुए बिहार की तरफ जाने के लिए वाहन खासकर बड़े ट्रकों को शहर के अंदर से होकर गुजरना पड़ता है। शहर की फैक्ट्रियों में आने-जाने वाले बड़े ट्रकों की वजह से शहर में हर वक्त जाम लगा रहता है। इन वाहनों को शहर में नहीं आना पड़ेगा और बाहर से ही बाईपास पकड़ लेंगे। इसके साथ जाखौदा व आसौदा की तरफ से केएमपी से उतरने व चढ़ने वाले वाहनों को नाहरा नाहरी रोड से हाईवे नंबर 44 पर पहुंचने को नया व खुला मार्ग भी मिल जाएगा।

जाखौदा से शुरू होकर दिल्ली बॉर्डर के पास एनएच-9 पर मिलेगा : 12 किमी लंबे बाईपास पर करीब 120 करोड़ रुपए खर्च होने का एस्टीमेट है और यह जाखौदा से शुरू होकर दिल्ली बॉर्डर के पास वापस एनएच-9 में मिल जाएगा। इसका निर्माण होने के बाद शहर को मेट्रो सिटी की तरह रिंग रोड मिल जाएगा।

पहले प्लानिंग थी कि ड्रेन के एक तरफ ही दोनों सड़कों का निर्माण किया जाए, लेकिन अब इस प्लानिंग को रद्द करके दोनों तरफ सड़क बानने की योजना को ही फाइनल कर दिया गया है। - केएस पठानिया, कार्यकारी अभियंता, पीडब्लूडी

दक्षिणी बाईपास पहले बन चुका,

उत्तरी अब तक लटका

शहर के बाहरी हिस्से में दक्षिणी बाईपास बनने से दिल्ली-रोहतक जाने वाले वाहनों की शहर में एंट्री कम हुई है। 2014 में सड़क एवं परिवहन मंत्रालय से उत्तरी बाईपास के प्रोजेक्ट को भी सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी, लेकिन यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में था। अब इसे डेढ़ साल में पूरा करने की तैयारी चल रही है। लाइनपार क्षेत्र में शहर की आधी आबादी बसती है। यहां रहने वाले लोगों को अगर दिल्ली, रोहतक या फिर नजफगढ़, गुरुग्राम की तरफ जाना होता है तो उन्हें शहर के जाम में फंसना पड़ता है। नया मार्ग तैयार होने पर उनकी कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी।

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