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नगर निगम में वार्डबंदी को लेकर प्रधान सचिव ने नहीं सुनी आपत्तियां

3 वर्ष पहले
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नगर निगम की वार्डबंदी को लेकर सोमवार को कांग्रेस की ओर से डाली गई याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई की गई। हाईकोर्ट की जस्टिस महेश ग्रोवर और राजबीर सिंह की डिवीजन बेंच ने इस मुद्दे पर सुबह 11 बजे चर्चा शुरु की। कांग्रेसी पार्षदों की ओर से दायर याचिका में नगर निगम की ओर से हरियाणा नगर निगम की वार्डबंदी करने के नियम 9 के उल्लंघन के मुद्दे को उठाया गया। ये याचिका कांग्रेस के पार्षद अशोक भाटी, गुलशन ईशपुनियानी, राजबीर सैनी, संजय सैनी व अनिता मिगलानी की अोर से दाखिल की गई है। पार्षदों की ओर से इस मामले में सीनियर एडवोकेट शैलेंद्र जैन ने पक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने कोर्ट को बताया गया कि वार्ड बंदी आपत्तियां मांगी गई थी, इसके बाद प्रधान सचिव या सरकार के स्तर पर आपत्तियों पर सुनवाई कर तय करना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। नगर निगम आयुक्त के स्तर पर ही आपत्तियों की सुनवाई कर उन्हें एडहॉक कमेटी में रख दिया गया, जोकि पूरी तरह से नियम के विरुद्ध है। फाइल होने के बाद अब कुछ दस्तावेजों को लेकर व जल्द ही न्याय की मांग करते हुए तेजी से सुनवाई करने की मांग की गई है।

याची का तर्क, चुनाव प्रक्रिया पर

लगे रोक

उधर मामले में फाइनल बहस करने पर समय लग रहा था, ऐसे में कोर्ट की ओर से अब 25 मई को सुनवाई की जाएगी। याची पक्ष का तर्क है कि अंतिम सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की ओर से चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाई जा सकती है। इस याचिका में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रधान सचिव, डायरेक्टर जनरल के जरिए नगर निगम रोहतक, आयुक्त, डीसी रोहतक को पार्टी बनाया गया है।

याचिका में कहा ये मर्डर ऑफ डेमोक्रेसी

कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में पार्षदों ने वार्डबंदी के दौरान वार्ड की तोड़फोड़ को गलत बताया है। साथ ही एक वार्ड से दूसरे वार्ड की दूसरी बांटने में बरती गई लापरवाही को उजागर किया गया है। इन मुद्दों को लेकर याचिका में नगर निगम के इस पूरे कारनामे को राजनीतिक लोगों को खुश करने के लिए मर्डर ऑफ डेमोक्रेसी बताया गया है।

अगस्त से पहले चुनाव की दलील

कोर्ट में जज ने पूछा कि क्या आप चुनाव को स्टे करवाना चाहते हैं तो इस पर वकील ने कहा कि हम चुनाव के बाद नहीं उससे पहले ही आ गए हैं। अगस्त से पहले चुनाव होने हैं। फिलहाल कोर्ट की कोर्ट की छुट्टियां हो रही है तो ऐसे में कम समय में इस पर सुनवाई की जाए। बहस पूरी होने पर समय लग रहा था तो इसके लिए समय मांग लिया गया था।

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