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रोहतक पीजीआई में खुलेगी देश की पहली वर्चुअल ऑटोप्सी लैब

3 वर्ष पहले
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पीजीआई में छह करोड़ की लागत से देश की पहली वर्चुअल ऑटोप्सी लैब खोली जाएगी। इस लैब के खुलने से प्रदेश भर से पोस्टमार्टम हाउस में आने वाले अज्ञात शवों की पहचान और उनकी उम्र का आसानी से पता लगाया जा सकेगा। शवों के अलग अलग टुकड़े करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। फिलहाल ऐसी लैब अमेरिका, डेनमार्क और इंग्लैंड सहित अन्य विकसित देशों में ही है।

उम्र और पहचान पता करने के लिए जगह जगह से नहीं काटना पड़ेगा शव

पीजीआई में पोस्टमार्टम के लिए प्रदेशभर से अज्ञात लोगों के शव आते है। आकड़ों पर गौर करें तो अधिकतर शव सड़ी गली अवस्था में होने के कारण जैसे तैसे पोस्टमार्टम किया जाता था। कोई तकनीक नहीं होने के कारण न तो मृतक की उम्र और पहचान करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। इतना ही नहीं मृतक की उम्र का पता लगाने के लिए पूरे शरीर को जगह जगह से काटना पड़ता था। इसके बाद उसकी हड्डियों के सैंपल लेने पड़ते थे। पीजीआई के फोरेंसिक मेडिसन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर एसके धत्तरवाल ने बताया कि वर्चुअल ऑटोप्सी लैब शुरू होने के बाद यह समस्या खत्म हो जाएगी। हड्डियों के सैंपल लिए बिना ही शव को स्कैन करके उम्र का पता लगाकर संबंधित थाने को रिपोर्ट भेज दी जाएगी। ताकि वह अपने क्षेत्र में लापता होने वाले बच्चे, व्यक्ति या महिला की उम्र से मैच करके डीएनए के माध्यम से पहचान करवा सके।

पांच मिनट में चलेगा पता, कौन सी गोली लगने से तोड़ा दम

लैब के खुलने से डॉक्टर, पुलिस और आमजन तकनीकी रूप से कई फायदे होंगे। कई बार मर्डर या मुठभेड़ के ऐसे मामले सामने आते है जिनमें किसी व्यक्ति या महिला की कई गोली लगने से मौत होती है लेकिन कोर्ट में पुलिस और डॉक्टर के लिए परेशानी बन जाती है। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर से पूछ लिया जाता है कि कौन सी गोली लगने से दम तोड़ा था। आमतौर पर माना जाता है कि दिल और सिर में गोली लगना मौत का मुख्य कारण माना जाता है। अन्य जगहों पर गोली लगने से बचने के आसार रहते है। अब इस तकनीक के माध्यम से डॉक्टर शव का सिटी स्कैन करके शव से एक-एक गोली निकाल सकेंगे। डॉक्टरों को दो से तीन घंटे तक सारे शव को काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अभी तक शव को जगह जगह से काटने के बाद भी पता नहीं चलता कि कितनी गोली शरीर के अंदर थी।

डायग्राम की जगह कोर्ट में फिल्म के दिखाकर पक्ष रखेंगे डॉक्टर

अभी तक पोस्टमार्टम करने के बाद डॉक्टर को पूरी कार्रवाई का डायग्राम बनाना पड़ता है। इसके बाद सुनवाई के दौरान उसे कोर्ट में पेश कर अपना पक्ष रखना पड़ता है। यह व्यवस्था शुरू होने के बाद संबंधित डॉक्टर पोस्टमार्टम कार्रवाई की एक फिल्म बना सकेगा। तारीख होने पर कोर्ट में फिल्म को दिखाकर अपना पक्ष रख सकेगा। फिलहाल लैब के लिए पुरानी एमआरआई और सिटी स्कैन मशीन खरीदने पर विचार किया जा रहा है। ताकि खर्चा कम हो सके। इस संबंध में रेडियोलॉजिस्ट से भी सलाह मशविरा किया जा रहा है।

हर महीने आते है 600 अज्ञात शव

पीजीआई के पोस्टमार्टम हाउस में हर महीने प्रदेशभर से 600 से 700 अज्ञात शव आते है। शवों की पहचान के बारे में पुलिस के पास कोई डाटा नहीं होता। ऐसे में इनके डीएनए मैच करने के लिए खून व विसरा के सैंपल लेने पड़ते है।

ऐसी होगी ऑटोप्सी वर्चुअल लैब

पीजीआई के फोरेंसिक मेडिसन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर एसके धत्तरवाल ने बताया कि देश में पहली बार बनने जा रही ऑटोप्सी वर्चुअल लैब पूरी तरह आधुनिक होगी। इस लैब में सिटी स्कैन, एमआरआई, डिजिटल एक्सरे सहित अन्य फेब्रिकेशन को रखा जाएगा। इसके अलावा आधुनिक उपकरणों के माध्यम से काम किया जाएगा।

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