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विभाजन के बाद गांधी कैंप में आसरा तो मिला पर सात दशक बाद भी पेयजल के लिए रात को ढो रहे मटके

3 वर्ष पहले
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विभाजन के बाद बसे गांधी कैंप के करीब 22 हजार क्षेत्रवासियों के लिए सात दशक बाद भी पानी की व्यवस्था नहीं हो सकी है। यहां न तो पीने के पानी की व्यवस्था है और न ही सप्लाई की। हालात यह है कि क्षेत्रवासियों को अपनी प्यास बुझाने के लिए एक किलोमीटर दूर दीवार फांदकर पीजीआई परिसर में लगे नल से पानी लाना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि उनकी न तो कांग्रेस सरकार ने सुनी और न ही अब भाजपा सरकार में कोई सुनवाई हो रही है। अब क्षेत्रवासियों ने बूस्टर लगाने की मांग की है।

1950 में बिछाई गई थी पेयजल लाइन

वर्ष 1947 में देश विभाजन के बाद पाकिस्तान से आए काफी विस्थापितों को गांधी कैंप क्षेत्र में बसाया गया था। उस समय एक व्यक्ति को रहने के लिए 33 वर्ग गज जगह दी गई थी। उस समय क्षेत्र में पानी की 80 प्रतिशत सप्लाई मानसरोवर पार्क के पास बनी डिग्गी और बाकी सप्लाई अन्य वाटर वर्कर्स से होती थी। इस इलाके में 1950 में पानी की लाइन बिछाई गई थी। धीरे धीरे लाइन खराब होने लगी और क्षेत्र की आबादी भी बढ़ने लगी। अब क्षेत्रवासियों का आरोप है कि लाइन टूटने और पुरानी होने के बावजूद उसे बदला नहीं गया। लाइन को अस्थाई तौर पर जोड़कर फिर से शुरू कर दिया गया। इसके बाद सप्लाई के पानी में सीवर के गंदे पानी की मिलावट होने लगी। जब क्षेत्रवासियों ने शिकायत की तो किसी ने उनकी नहीं सुनी। अब क्षेत्रवासियों का आरोप है कि सात दशक बीत गये, इसके बावजूद किसी भी सरकार ने पानी की व्यवस्था नहीं की। इस संबंध में क्षेत्रवासी संबंधित पार्षद से लेकर सहकारिता मंत्री और जिला प्रशासन से गुहार लगा चुके है। लेकिन आज तक कोई भी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है।

रोहतक. गांधी कैंप में पानी की किल्ल्त के चलते पीजीआइ के परिसर में पेयजल के लिए लगी कतार। (दाएं)-शनिवार देर शाम पीजीआई परिसर में पानी लेने जातीं गांधी कैंप की महिलाएं।

डॉ. मंगलसेन स्मृति न्यास ने शुरू की पंचायती सबमर्सिबल व्यवस्था

क्षेत्रवासियों को राहत देने के लिए डॉ. मंगलसेन स्मृति न्यास संस्था ने यहां पंचायती सबमर्सिबल की व्यवस्था की है। न्यास के प्रदेशाध्यक्ष लवलीन टुटेजा ने संस्था के अन्य स5दस्यों और क्षेत्रवासियों के साथ मिलकर पंचायती तौर पर सबमर्सिबल लगाने की व्यवस्था शुरू की है। वह अभी तक क्षेत्र में करीब सात जगह पर सबमर्सिबल लगवा चुके है। इन सबमर्सिबल से लोग बारी बारी से पानी भरते है। इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए संस्था ने क्षेत्रवासियों से 100- 100 रुपये सहयोग भी लिया है। लवलीन टुटेजा ने बताया कि फिलहाल उन्होंने क्षेत्र में 15 सबमर्सिबल लगाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि उनके पास 20 से ज्यादा मांगपत्र आ चुके है।

सबमर्सिबल पंप लगा चला रहे काम

क्षेत्रवासियों की हालत यह है कि कुछ लोगों ने अब खुद ही पानी की व्यवस्था की है। सप्लाई नहीं आने के कारण कुछ लोगों ने घरों में नल और सबमर्सिबल पंप लगवा लिये है। एक दूसरे के नलों से पानी लेकर लोग अपना काम चला रहे है। हालांकि पीने का पानी लोगों को पीजीआई परिसर में लगे नल से ही लाना पड़ता है।

अब तो सीएम के सामने उठाएंगे समस्या

पीजीआई के नल पर सुबह से शाम तक लगी रहती है लाइन

पीने के पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण क्षेत्रवासियों को एक किलोमीटर दूर पीजीआई परिसर में लगे नल से पानी ढोना पड़ता है। इस नल पर सुबह से शाम तक क्षेत्रवासियों की लाइन लगी रहती है। शाम होते ही क्षेत्रवासियों की लंबी कतार लग जाती है। क्षेत्रवासियों को सबसे ज्यादा परेशानी गर्मियों के मौसम में होती है।

जगह जगह टूटी पड़ी सप्लाई की लाइन, 15 साल

से नहीं मिला साफ पानी

क्षेत्रवासियों का कहना है कि पुरानी होने के कारण क्षेत्र में पानी सप्लाई की लाइन जगह जगह से टूटी पड़ी है। जन स्वास्थ विभाग के अधिकारी लाइन बदलने की जगह उसकी मरम्मत करके चले जाते है। कई जगह गढ्ढ़े भी खुले ही छोड़ जाते है। पुरानी होने के कारण लाइन पहले से ही कई जगह पर लीक है। दूसरी तरफ गढ्ढ़े होने से सीवर और सप्लाई का पानी एक जगह मिल जाता है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि पिछले करीब 15 साल से उनके पास सप्लाई का साफ पानी नहीं आया।

क्षेत्र के लोग लंबे समय से पानी की समस्या से जूझ रहे है। सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर से लेकर अन्य नेताओं व अधिकारियों से गुहार लगा चुके है। लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। हमारी संस्था ने सबमर्सिबल लगाकर समस्या को दूर करने का प्रयास किया है। जल्द ही इस संबंध में सीएम से मुलाकात करेंगे। - लवलीन टुटेजा, प्रदेशाध्यक्ष, डॉ मंगलसेन स्मृति न्यास।

जरूरत पर हम तो टैंकर भी भेजते हैं

गांधी कैंप में मांग के हिसाब से प्रतिदिन पानी की सप्लाई की जाती है। जहां तक लाइन बिछी है। वहां तक पानी भेजा जाता है। इसके अलावा टैंकर भी भेजे जाते है। यदि पानी में गंदगी आ रही है तो रविवार को जांच करवाई जाएगी। - भानू प्रताप शर्मा, एक्सईएन जन स्वास्थ विभाग

पिछले तीन साल से हमारे घर में सप्लाई का पानी नहीं आया। बाद में घर में नल लगवाना पड़ा। आज भी पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। पीजीआई परिसर के नल से पीने का पानी लाया जाता है। न तो पार्षद सुनता है न ही जिला प्रशासन। -ईश्वरी देवी, स्थानीय निवासी

मेरी शादी के 21 साल बाद भी यहां पर पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। जब पार्षद के पास शिकायत लेकर जाते है तो धक्के मारकर बाहर भगा देते है। न ही मंत्री कोई सुनवाई करता है। जबकि वोट मांगने के लिए सब लोग आ जाते है। -किरण, स्थानीय निवासी

15 साल से मेरे घर में गंदे पानी की सप्लाई हो रही है। जो भी थोड़ा बहुत पानी आता है उसमें सीवरेज का गंदा पानी मिला होता है। ऐसे में बीमार होने का खतरा बना रहता है। पड़ोसी के नल से पानी भरकर गुजारा करना पड़ता है। कपड़े धोने के लिए भी पानी नहीं मिलता। -जगपाल, स्थानीय निवासी

मैं तीन चार भैंस पालकर परिवार का गुजारा करता हूं। जब पानी की कोई व्यवस्था नहीं हुई तो खुद के पैसे से सबमर्सिबल लगवाया। मगर आज भी पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। पीजीआई परिसर से पानी लाना पड़ता है। पिछले 15 साल से ये ही हालात हैं, महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं। -महेंद्र, स्थानीय निवासी

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