कैंसर, हार्ट, थैलेसिमिया और हार्मोंस से जुड़ी बीमारियों का जल्द से जल्द पता लगाने के लिए अब पीजीआई में इम्यूनोऐस्से सिस्टम लगेगा। इसे पीजीआई के बॉयोकेमिस्ट्री विभाग में लगाया जाएगा। इस सिस्टम के तहत होने वाले अधिकतर टेस्ट लाइफ सेविंग टेस्ट होंगे। विभाग की तरफ से सिस्टम को खरीदने के लिए परचेज ब्रांच को टेंडर जारी कर दिया गया है।
इम्यूनोऐस्से सिस्टम एक प्रकार से जांच उपकरण है। इसे चिकित्सा परीक्षणों की एक बड़ी श्रृंखला भी कहा जाता है। इसके सिस्टम के माध्यम से कैंसर, हार्ट, फर्टिलिटी टेस्ट, थैलेसिमिया और हार्मोन्स से जुड़ी अन्य बीमारियों की जांच की जाती है। इसके तहत मरीज का ब्लड सैंपल लेकर उसको टेस्ट किया जाता है। पीजीआई में अभी तक यह व्यवस्था नहीं थी। लोगों को इन बीमारियों की जांच के लिए निजी अस्पतालों की तरफ रूख करना पड़ता था। इतना ही नहीं प्रदेश के कई जिलों के निजी अस्पतालों में भी यह सिस्टम नहीं है। इस कारण लोगों को दिल्ली या अन्य जगह जाकर जांच करानी पड़ती है।
पीजीआई में इम्यूनोऐस्से सिस्टम से होगी कैंसर, हार्ट, थैलेसिमिया और हार्मोंस की बीमारियों के टेस्ट
घातक बीमारियों का होगा समय पर उपचार
इम्यूनोऐस्से सिस्टम शुरू होने के बाद कई तरह के मरीजों को फायदा होगा। इम्यूनोऐस्से जांच करवाने से कैंसर जैसी घातक बीमारी का जल्द से जल्द पता चल सकेगा। ताकि कैंसर के मरीज को उसकी बीमारी की स्टेज के हिसाब से उपचार दिया जा सके। अभी तक यह व्यवस्था नहीं थी। इसके अलावा अधिकतर बच्चों में होने वाली बीमारी थैलेसिमिया के उपचार में भी मदद मिलेगी। बीमारी का सही समय पर पता चलने पर उपचार मिल सकेगा। थैलेसिमिया एक आनुवांशिक रोग है। इसी यह बीमारी होने से बच्चों में खून बनना बंद हो जाता है। यदि समय पर उपचार न मिले तो बच्चे की मौत हो जाती है।
जांच के बाद जल्द मिलेगा सटीक परिणाम
डेढ़ करोड़ की लागत से 1 महीने में होगा शुरू
बॉयोकेमिस्ट्री विभाग की तरफ से जल्द से जल्द इम्यूनोऐस्से सिस्टम को शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। ताकि जांच के लिए आने वाले मरीजों को वापस न भेजना पड़े। विभाग ने एक महीने के अंदर ही जांच शुरू करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए पीजीआई की परचेज विभाग को प्रस्ताव भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि जांच उपकरण की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये है।
इम्यूनोऐस्से जांच का फायदा दिल के मरीजों को ज्यादा होगा। इसकी जांच के बाद सटीक पता चल सकेगा कि मरीज को दिल की बीमारी है या नहीं। अभी तक दिल की बीमारी के बारे में सटीक पता लगाने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी। यदि किसी की छाती में भी दर्द होता था तो वह हार्ट अटैक की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास आ जाता था। लेकिन अब इस टेस्ट के बाद दिल की बीमारी व सामान्य दर्द का अंतर स्पष्ट हो जाएगा।
पॉलीसिस्टिक ओवरिन डिजीज की होगी जांच
विभागाध्यक्ष डॉ. वीना सिंह गहलोत ने बताया कि इम्यूनोऐस्से के माध्यम से हार्मोंस से जुड़ी पीसीओडी यानी पॉलीसिस्टिक ओवरिन डिजीज की भी जांच की जाएगी। पॉलीसिस्टिक ओवरिन डिजीज हार्मोंस से जुड़ी होती है। इनमें फर्टिलिटी, अनियमित मासिक धर्म, असंतुलन के कारण अंडाशय में गांठ, चेहरे और शरीर पर अधिक बाल, मुंहासे, डैंड्रफ, पेटदर्द, गर्भधारण में मुश्किल, गर्भपात और मोटापे की समस्या शामिल है। इनमें अधिकतर बीमारी महिलाओं में पाई जाती है। यदि इन बीमारियों की समय पर जांच और उपचार नहीं किया जाता तो यह घातक सिद्ध होती है। अब इन बीमारियों का भी एक टेस्ट के बाद आसानी से पता चल सकेगा।