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गच्चा दे रहे अपराधी, 5 महीने में 21 ने की पैरोल जंप

3 वर्ष पहले
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जेल से जमानत में बाहर आए और फिर फरार पैरोल जंपर पुलिस के सामने बड़ी चुनौती साबित हो रहा हैं। प्रदेश में पिछले दिनों हुई कई वारदात के पीछे कुख्यात पैरोल जंपर के नाम सामने आए हैं। कुछ पुलिस के काबू भी आए हैं लेकिन अभी तक 5 महीने में 21 शातिर अपराधी पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद वापस नहीं लौटे। इन सभी के खिलाफ विभिन्न थाना क्षेत्रों में केस दर्ज हो चुके हैं। रोहतक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के बाहर हुई हत्याकांड और जिला पंचायत चेयरमैन की हत्या करने की साजिश में भी पकड़े गए अपराधी पैरोल जंपर थे। ऐसा तब हो रहा है जब पुलिस प्रशासन ने बेल और पैरोल जंपर को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की एक विशेष टीम बना रखी है। इसके बाद भी कुख्यात पैरोल पर बाहर आकर वारदात कर पुलिस को चैलेंज कर रहे हैं।

बाहर आकर वारदात कर रहे

इस साल के पांच महीने में 21 अपराधी पैरोल जंपर है। जिनमें से दो पर पुलिस इनाम भी घोषित कर चुकी है। इनमें कई कुख्यात बदमाश है जो बड़ी वारदातों को अंजाम देने में शामिल रहे है। जिनको पकड़ने के लिए पुलिस की विशेष टीम गठित की गई , लेकिन पुलिस अब तक इन बदमाशों को पकड़ने में सफल नहीं हो पाई। हालांकि पुलिस ने इनमें से पांच बदमाशों के फोटो जिला एसपी कार्यालय समेत थानों के नोटिस बोर्ड पर चस्पा रहे है।

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पैरोल जंप करने वालों में ईनामी बदमाश शामिल

पैरोल जंप करने वाले बदमाशों की सूची में छोटी वारदात को अंजाम देने वाले बदमाशों के अलावा कई बड़े बदमाश भी शामिल है। जिनमें अशोक उर्फ डोगा पर 50 हजार रुपये का इनाम है, मनीष किलोई भी इनामी बदमाश है। इसके अलावा सुंदर मकड़ौली, भालू उर्फ भगता निवासी कैलाश काॅलोनी शामिल है, जिनके पुलिस ने फोटो नोटिस बोर्ड पर चस्पा रखे है।

पैरोल जंपर की लिस्ट पुलिस ने कराई अपडेट

पैरोल जंप अपराधियों की लिस्ट अभी अपडेट करवाई गई है। इनकी गिरफ्तारी के लिए एक विशेष टीम गठित की गई। जो इनको जल्द ही गिरफ्तार करेगी। पुलिस की ये टीम अपने बदमाशों पर निरंतर नजर रखेगी। -जश्नदीप रंधावा, एसपी रोहतक ।

जमानत मिलने के बाद

गिरोह से जुड़ते हंै बदमाश

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि बेल जंप करने के बाद आरोपियों को अपने इलाके में रहना मुश्किल हो जाता है। इस कारण वे अन्य जिलों व प्रदेशों के बदमाशों के साथ अपने संबंध बनाते है। इसके बाद उन्हीं के गिरोह के साथ मिलकर वारदातों को अंजाम देना शुरू कर देते है। ताकि वे जिले व प्रदेश पुलिस की नजर से दूर रहे। वहीं दूसरे प्रदेश के अपराधियों को अपने ठिकानों पर भी पनाह दिलवा देते हैं।

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