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मप्र समेत 10 राज्यों में एटीएम सूखे; 13 दिन में 5 गुना ज्यादा नोट निकले, अब इतनी ही तेजी से छपाई शुरू

3 वर्ष पहले
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राहुल का तंज- नोटबंदी का आतंक दोबारा छाया

समझो अब नोटबंदी का फरेब, आपका पैसा नीरव मोदी की जेब। मोदीजी की क्या माल्या माया, नोटबंदी का आतंक दोबारा छाया। देश के एटीएम सब फिर से खाली, बैंकों की क्‍या हालत कर डाली।’ -राहुल गांधी

एटीएम से अप्रैल में अब तक निकलने चाहिए थे 8.45 हजार करोड़ रुपए, निकाले गए 45 हजार करोड़ रुपए; दो हजार के नोट नदारद

मलैया ने कहा- आरबीआई से मिल रहे नोट पर्याप्त नहीं, कैश लेन-देन कम करें

वह सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं

क्या हुआ जनवरी से ही नकदी की मांग ज्यादातर राज्यों में दोगुनी हो गई थी

हर माह 19 से 20 हजार करोड़ रु. नकदी की मांग रहती है। पर जनवरी से मांग दोगुनी हो गई। जनवरी से मार्च में हर माह 40 से 45 हजार करोड़ रु. सप्लाई किए गए। इससे स्टॉक कम हुआ। सामान्यत: 3 लाख करोड़ के बदले अभी 1.75 लाख करोड़ का स्टॉक है।

और आगे क्या सभी 4 नोट प्रेस में छपाई तेज कर दी गई, 3 से 4 दिन में सुधार के आसार

आरबीआई का कहना है कि उसके पास पर्याप्त नकदी है। लॉजिस्टिक कारणों से कुछ राज्यों में एटीएम में नकदी भरने और कैलिब्रेशन की प्रक्रिया जारी रहने से दिक्कतें हैं। फिर भी सभी चार नोट प्रेसों में छपाई तेज कर दी गई है। और ये अंदेशा: संदेह है कि दो हजार के नोटों की जमाखोरी हो रही है। निपटने के लिए 500 के नोटों की छपाई 5 गुना बढ़ाई जाएगी।

देवास से लाइव नोटबंदी के बाद दूसरी बार लिया गया तीसरी शिफ्ट शुरू करने का फैसला

देवास| 18 अप्रैल से देवास बैंक नोट प्रेस में 24 घंटे मशीनें चलाई जाएंगी। इसके लिए 9 घंटे की तीसरी शिफ्ट शुरू कर दी गई है। नोटबंदी के बाद दूसरा मौका है जब 24 घंटे मशीनें चलेंगी।

क्यों हुआ 2000 के नोट की छपाई बंद होना और शादी का सीजन बड़ी वजह

18 लाख करोड़ की नकदी चलन में है। इनमें 6.7 लाख करोड़ रु. दो हजार के नोटों में हैं। ये नोट वापस नहीं आ रहे। 2000 के नोट एटीएम में डालने पर 60 लाख रु. तक आते हैं। पर छोटी करेंसी 15 से 20 लाख रु. तक के ही आते हैं। इस बीच शादी का सीजन जारी है।

इधर, मप्र में 9602 एटीएम, आधे खाली

7 दिन में बैंकों से निकले 23100 करोड़, जमा हुए 17,500 करोड़ रु.

सरकार को किसान और अन्य को बांटने हंै 30 हजार करोड़ रुपए, बंटे सिर्फ 4 हजार करोड़

गुरुदत्त तिवारी | भोपाल. मप्र में 9602 एटीएम हैं, इनमें से आधे खाली हैं। बैंकों में जमा और निकासी का अंतर रोजाना 700 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। प्रदेश में इस किल्लत की सबसे बड़ी वजह मंडियों में हो रही सरकारी खरीद को बताया जा रहा है। बैंकों को अप्रैल-मई में मप्र सरकार का 30,000 करोड़ रुपया बांटना है। आपूर्ति निगम की ओर से पूरे 51 जिलों में भारी कैश की डिमांड है। अब तक बैंक केवल 4000 करोड़ रु. ही बांट सके हैं। यानी अभी 26,000 करोड़ रु. बांटना शेष है। प्रदेश में पिछले 7 दिन में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की शाखाओं में जमा और निकासी का अंतर 1400 करोड़ से ज्यादा रहा। बैंक से 3600 करोड़ रु. निकले, लेकिन जमा केवल 2200 करोड़ रुपए ही हुए। इस दौरान पूरे प्रदेश में सभी बैंकों में 23,100 करोड़ रु. निकल गए, लेकिन जमा 17,500 करोड़ रुपए ही हुए।

इंदौर के 1800 में से 600 एटीएम में ही कैश उपलब्ध

इंदौर के 1800 से ज्यादा एटीएम में से 600 में ही कैश की उपलब्धता थी। इसका कारण है कि एटीएम भरने के लिए रोज 100 करोड़ रु. चाहिए, लेकिन 25 करोड़ ही आ रहे हैं। लीड बैंक मैनेजर मुकेश भट्‌ट का कहना है कि कैश कम आ रहा है। समस्या जल्द दूर होगी। -इंदौर फ्रंट पेज भी पढ़ें

किसानों के खाते में पहुंचे 1650 करोड़, लेकिन निकाल नहीं पाए

सरकार ने प्रदेश के 10 लाख किसानों के खाते में एक क्लिक कर 1650 करोड़ रु. तो डाल दिए गए, लेकिन यह राशि किसान नहीं निकाल पा रहे हैं। बुधवार को अधिकांश जगह विवाह समारोह है। लेकिन कैश की कमी से दिक्कत हो रही है।

कैश मैनेजमेंट कमेटी का गठन

हमने कैश मैनेजमेंट कमेटी का गठन किया है। मंडियों में हो रही खरीद का भुगतान इस कैश संकट की सबसे बड़ी वजह है। -अजय व्यास, समन्यक, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति

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