आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे पर रुठियाई के पास स्लीपर कोच बस सड़क किनारे खड़े ट्रक से भिड़ गई।
देर रात को ब्रेक जाम होने की वजह से ट्रक हाईवे पर खड़ा रह गया था
भास्कर संवाददाता | गुना. रुठियाई. राघौगढ़
अागरा-मुंबई नेशनल हाईवे पर सोमवार सुबह 5 बजे रुठियाई बायपास के पास खड़े ट्रक से भिड़ी स्लीपर कोच में वही खामी थी, जो तमाम निर्देशों के बावजूद नहीं सुधारी जा रही है। बस में आपात दरवाजा नहीं था। इससे घायलों व अन्य यात्रियों को खिड़कियों के कांच तोड़कर बाहर निकाला गया। जिन यात्रियों को मामूली चोट आई थी, वे खुद कांच तोड़कर बाहर निकले। इस हादसे में ड्राइवर व क्लीनर सहित 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि 2 ने बाद में अस्पताल लाते हुए या उपचार के दौरान दम तोड़ा। मारे गए सभी लोग बस के अगले हिस्से में थे, जो टक्कर के बाद बुरी तरह से पिचक गया था। मृतक इसमें बुरी तरह से फंसे हुए थे, जिन्हें निकालने के लिए बस के कई हिस्सों को काटना पड़ा पर यहां भी कुछ चमत्कार हुए। बस के अगले हिस्से में बैठी एक महिला और उसकी 5 माह की बेटी को खरोंच तक नहीं आई। जबकि साथ ही बैठे उसके भाई व डेढ़ साल की भतीजी की मौत हो गई। हादसे के बाद राघौगढ़ एसडीएम अत्येंद्र सिंह गुर्जर और गुना एसडीएम दिनेश शुक्ला भी पहुंच गए।
बस की रफ्तार बहुत ज्यादा थी, तभी खड़े ट्रक से भिड़ने के बावजूद उसका अगला हिस्सा चकनाचूर हो गया
खिड़की के कांच तोड़कर सबसे पहले तीसरे नंबर के स्लीपर पर बैठा परिवार निकला, सभी सुरक्षित
बांदा के रहने वाले अमीन रजक उनके दो बेटे और प|ी उन खुशनसीबों में थे, जो बच गए। वे तीसरे नंबर की स्लीपर पर सो रहे थे। उन्होंने बताया कि तेज झटके से उनकी नींद खुली। चारों ओर चीख पुकार मची हुई थी। वे सबसे पहले बस से बाहर निकले। उन्होंने खिड़की का कांच तोड़ा और उसके बाद पहले वे और फिर उनके परिवार के सदस्य बाहर निकले। उन्होंने बताया कि पुलिस 15-20 मिनट बाद आई। जबकि वहां से गुजर रही एक बस के यात्रियों ने हमारी सबसे पहले मदद की। हादसे की अफरा-तफरी में उनका एक बैग गायब हो गया, जिसमें प|ी के जेवर आदि थे।
2009 के बाद इस हाईवे पर सबसे बड़ा भीषण हादसा
सोमवार को हुआ हादसा हाईवे 2009 के बाद सबसे भीषण है। 21 दिसंबर 2009 को एबी रोड पर दौराना चौराहा और रूठियाई के बीच हुआ था। दौराना पेट्रोल पम्प के ठीक सामने शाम 4:45 बजे हुई प्रियंका ट्रेवल्स की बस व कंटेनर में आमने-सामने की भिड़ंत हो गई थी। उस हादसे में 17 की मौत 28 लोग घायल हुए थे। घायलों और मृतकों में ज्यादातर शिक्षक और शिक्षिकाएं थे ।
चमत्कार : भाई और भतीजी की मौके पर ही मौत लेकिन पूजा और उसकी 5 माह की बेटी को खरोंच तक नहीं आई
इस भीषण हादसे में बस के अगले हिस्से में बैठे ज्यादातर लोग या तो मारे गए या फिर गंभीर रूप से घायल हो गए पर उप्र के बांदा जिला के महुआखेर गांव में रहने वाली पूजा और उसकी पांच माह की बेटी मुस्कान अपवाद रहे। जबकि उसके भाई विमल और डेढ़ साल की भतीजी पूजा, जो उनके पास ही थे, की मौत हो गई। पूजा ने बताया कि बेटी उसकी गोद में थी और वह खुद नींद में थी। उसे बस इतना याद है कि अचानक तेज धक्का लगा। उसी पल उसने बेटी को भी अपने सीने से सटा लिया।
हादसे की तीन वजह
1.ट्रक दांई ओर खड़ा था, बांई ओर होता तो शायद टक्कर न होती : ब्रेक जाम होने के बाद ट्रक सड़क के दांई ओर खड़ा कर दिया गया था। इसी से हादसा हुआ।
2.नींद : हादसे के हालात बताते हैं, ड्राइवर को झपकी ही आई होगी : एसडीएम ने बताया कि हादसे पहले बस का ड्राइवर रशीद खान लगातार 7 घंटे से बस चला रहा था। जिस तरह से बस भिड़ी उससे यह लगता है कि उसे नींद आ गई होगी।
3.रफ्तार : बस की हालत बताती है कि वह कितनी रफ्तार से भिड़ी : घटनास्थल से कुछ ही दूर पर स्थित ढाबे के संचालक बसंत शर्मा ने बताया कि बस की रफ्तार 90 से 100 किमी के आसपास रही होगी। बस की हालत देखकर इसका अंदाजा लग रहा है।